Knews Desk- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर के नए अवसर पैदा किए हैं। अब कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है, जो AI टूल्स और सॉफ्टवेयर बनाने के साथ उन्हें व्यावसायिक जरूरतों के मुताबिक लागू भी कर सकें। इसी वजह से फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर (FDE) की भूमिका चर्चा में है। इस क्षेत्र में काम करने वाले योग्य प्रोफेशनल्स को सालाना 40 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का पैकेज मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक सैलरी उम्मीदवार के अनुभव, विशेषज्ञता और कंपनी पर निर्भर करती है।
स्केलर साइबरमीडिया रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में FDE प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2030 तक 88 प्रतिशत कंपनियां इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की संभावना देख रही हैं। इसके अलावा, 77 प्रतिशत मल्टीनेशनल कंपनियां अगले 12 महीनों में ऐसे प्रोफेशनल्स की भर्ती करने की योजना बना रही हैं। यह संकेत देता है कि AI के क्षेत्र में तकनीकी जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर ऐसे प्रोफेशनल होते हैं, जो सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, AI इंजीनियरिंग और बिजनेस की समझ को एक साथ इस्तेमाल करते हैं। इनका मुख्य काम ग्राहकों की जरूरतों को समझना और उनके लिए प्रभावी तकनीकी समाधान तैयार करना होता है। ये इंजीनियर AI आधारित सिस्टम को कंपनियों के मौजूदा सॉफ्टवेयर और कार्यप्रणाली से जोड़ते हैं। इसके बाद यह सुनिश्चित करते हैं कि तैयार किया गया समाधान वास्तविक परिस्थितियों में सही तरीके से काम करे। तकनीक लागू करने के दौरान आने वाली समस्याओं को दूर करना भी इनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
इस क्षेत्र में कंपनियां केवल कोडिंग करने वाले इंजीनियरों के बजाय ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो तकनीक को व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ सकें। रिपोर्ट के अनुसार, 80 प्रतिशत कंपनियां AI और जनरेटिव AI स्किल्स को प्राथमिकता देती हैं। वहीं, 77 प्रतिशत कंपनियों के लिए प्रोडक्शन डिप्लॉयमेंट और 61 प्रतिशत कंपनियों के लिए ग्राहक संवाद तथा बिजनेस की समझ महत्वपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि इस भूमिका में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ संवाद कौशल और समस्या समाधान की क्षमता भी जरूरी है।
FDE के रूप में करियर बनाने के लिए उम्मीदवारों को AI, जनरेटिव AI, क्लाउड टेक्नोलॉजी, डेटा सिस्टम, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और प्रोडक्शन डिप्लॉयमेंट की जानकारी हासिल करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करने और ग्राहकों की समस्याओं का तकनीकी समाधान तैयार करने का अनुभव भी विकसित करना होगा। केवल प्रोग्रामिंग भाषाओं का ज्ञान इस भूमिका के लिए पर्याप्त नहीं है।
मौजूदा सॉफ्टवेयर इंजीनियर AI और सिस्टम इंटीग्रेशन की स्किल्स सीखकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। इसी तरह AI और मशीन लर्निंग से जुड़े प्रोफेशनल्स डिप्लॉयमेंट और ग्राहक संवाद का अनुभव हासिल कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 47 प्रतिशत कंपनियां सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और 39 प्रतिशत कंपनियां AI तथा मशीन लर्निंग इंजीनियरों की स्किल्स बेहतर बनाने की योजना बना रही हैं।
AI के दौर में FDE की भूमिका उन इंजीनियरों के लिए एक नया करियर विकल्प बन सकती है, जो तकनीक के साथ व्यावसायिक समस्याओं का समाधान करने में रुचि रखते हैं। हालांकि, करोड़ों रुपये के पैकेज हर उम्मीदवार को मिलना तय नहीं है। इसके लिए मजबूत तकनीकी आधार, व्यावहारिक अनुभव और लगातार नई स्किल्स सीखना जरूरी होगा।