टीचर्स की चुनावी ड्यूटी पर स्थिति स्पष्ट: कब लग सकती है ड्यूटी और कब नहीं, जानिए नए नियम

Knews Desk- चुनावी कार्यों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि स्कूल के शिक्षण समय के दौरान किसी भी शिक्षक की चुनावी ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। आयोग ने यह भी भरोसा दिया कि भविष्य में भी पढ़ाई प्रभावित होने वाली स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि किसी भी स्कूल से सीमित संख्या में ही शिक्षकों को चुनावी कार्यों के लिए लगाया जाता है। आमतौर पर कुल शिक्षकों में से केवल 10 से 14 प्रतिशत को ही चुनावी जिम्मेदारी दी जाती है, ताकि स्कूलों में पढ़ाई सामान्य रूप से जारी रह सके।

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने, मतदाता सूची तैयार करने और मतगणना जैसी प्रक्रियाओं के संचालन का अधिकार प्राप्त है। इसी संवैधानिक अधिकार के आधार पर आयोग जरूरत पड़ने पर सरकारी कर्मचारियों, जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं, की चुनावी ड्यूटी तय करता है।

हाल ही में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर विवाद सामने आने के बाद यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां आयोग ने अपनी नीति स्पष्ट की।

सुनवाई के दौरान 2007 में सेंट मैरी बनाम चुनाव आयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया। इस फैसले में कहा गया था कि चुनाव आयोग शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी होगी कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चों की शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अदालत ने याद दिलाया कि राइट टू एजुकेशन (RTE) कानून, 2009 का उद्देश्य भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में स्कूल के नियमित समय में शिक्षकों को चुनावी कार्यों में लगाना उचित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी शिक्षक से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह पूरे दिन स्कूल में पढ़ाने के बाद चुनावी ड्यूटी भी निभाए। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यकता हो तो शिक्षकों की ड्यूटी छुट्टी वाले दिन या ऐसे समय में लगाई जाए, जिससे उन पर अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक दबाव न पड़े।

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में बताया कि चुनावी ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को निर्धारित मानदेय दिया जाता है। साथ ही ड्यूटी के दौरान जलपान सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाती है। आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करना है, जबकि शिक्षकों और छात्रों दोनों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

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