Canada Wildfire: हजारों किलोमीटर दूर न्यूयॉर्क तक कैसे पहुंच गया जंगलों की आग का धुआं?

Knews Desk- कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग अब केवल उस देश तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका असर पड़ोसी देश अमेरिका में भी साफ दिखाई देने लगा है। कनाडा के कई प्रांतों में फैली जंगल की आग से उठने वाला घना धुआं हजारों किलोमीटर का सफर तय कर न्यूयॉर्क समेत अमेरिका के कई राज्यों तक पहुंच गया है। इसके चलते कई शहरों में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) गंभीर स्तर तक पहुंच गई है और स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां जारी की गई हैं।

कनाडा के इंटरएजेंसी फॉरेस्ट फायर सेंटर (CIFFC) के अनुसार, देशभर में 800 से अधिक स्थानों पर जंगलों में आग लगी हुई है, जिनमें लगभग 194 आग पूरी तरह बेकाबू हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज, ओंटारियो और क्यूबेक हैं। केवल इस साल अब तक लगभग 3,500 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 48 लाख एकड़ से अधिक जंगल जल चुके हैं। इतनी बड़ी आग से निकलने वाला धुआं अब उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहा है।विशेषज्ञों के मुताबिक, धुएं के इतनी लंबी दूरी तय करने के पीछे मौसम विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब जंगलों में आग लगती है तो उससे निकलने वाली गर्म हवा और धुआं तेजी से ऊपर उठकर वायुमंडल की ऊपरी परतों तक पहुंच जाता है। वहां यह धुआं जेट स्ट्रीम (Jet Stream) नामक तेज गति वाली हवाओं में शामिल हो जाता है। जेट स्ट्रीम पश्चिम से पूर्व की दिशा में बहने वाली अत्यधिक तेज हवाएं होती हैं, जो धुएं को सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचा सकती हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार धुएं के अमेरिका तक पहुंचने की एक और बड़ी वजह हवा की दिशा में बदलाव और अमेरिका के मध्य हिस्से में बना हीट डोम (Heat Dome) है। हीट डोम एक ऐसी मौसमीय स्थिति होती है, जिसमें गर्म हवा किसी क्षेत्र में फंस जाती है। इसने कनाडा से आने वाले धुएं को अमेरिका के पूर्वोत्तर और मध्य-अटलांटिक क्षेत्रों की ओर तेजी से फैलाने में मदद की। इसी कारण न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और आसपास के कई इलाकों में धुंध और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।धुएं का सबसे ज्यादा प्रभाव तब दिखाई देता है जब वह वायुमंडल की ऊंचाई से नीचे उतरकर जमीन के करीब पहुंच जाता है। सामान्य परिस्थितियों में धुएं का बड़ा हिस्सा ऊपरी परतों में ही रहता है, लेकिन मौसम में बदलाव के कारण कई बार यह सतह के करीब आ जाता है। ऐसी स्थिति में हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब हो जाती है और लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल की आग के धुएं में मौजूद PM2.5 नामक सूक्ष्म कण सबसे अधिक खतरनाक होते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि आसानी से फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और कई मामलों में रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग, आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से श्वसन या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए यह धुआं अधिक खतरनाक माना जाता है।खराब होती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए कनाडा और अमेरिका के कई शहरों में लोगों को घरों के भीतर रहने, मास्क पहनने और अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है। कनाडा में एयर क्वालिटी अलर्ट के चलते कई सार्वजनिक कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और लंबे समय तक रहने वाले सूखे की वजह से जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यही कारण है कि अब ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीमाओं को पार कर दूसरे देशों के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

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