देश में लड़कियों की शिक्षा पर बड़ा सवाल, 12वीं तक क्यों नहीं पहुंच पा रहीं छात्राएं?

Knews Desk– देश में उच्च शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी के बीच स्कूल शिक्षा से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि प्राथमिक स्तर पर बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ाई जारी रखती हैं, लेकिन 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते लगभग हर दूसरी लड़की स्कूल छोड़ देती है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में लड़कियों के रिटेंशन रेट (Retention Rate) से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि प्राथमिक कक्षाओं में छात्राओं का रिटेंशन काफी बेहतर है, लेकिन उच्च कक्षाओं तक पहुंचते-पहुंचते इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की जाती है।यह जानकारी समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया द्वारा सरकारी स्कूलों और छात्राओं की पढ़ाई छोड़ने से जुड़े सवाल के जवाब में दी गई। सरकार ने संसद में वर्ष 2025 के रिटेंशन रेट के आंकड़े पेश किए, जिनके अनुसार प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का रिटेंशन रेट 92.2 प्रतिशत है। यानी अधिकांश छात्राएं प्राथमिक शिक्षा पूरी कर रही हैं। हालांकि, सीनियर सेकेंडरी यानी 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते यह आंकड़ा घटकर 55 प्रतिशत रह जाता है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं।

रिटेंशन रेट का अर्थ है कि एक छात्र या छात्रा बिना पढ़ाई छोड़े लगातार अगली कक्षाओं तक पहुंचता है। ऐसे में प्राथमिक स्तर और 12वीं कक्षा के बीच इतना बड़ा अंतर शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती की ओर संकेत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक स्थिति, सामाजिक कारण, बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियां, स्कूलों की दूरी और संसाधनों की कमी जैसे कई कारण लड़कियों के स्कूल छोड़ने की बड़ी वजह बनते हैं।राज्यों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई राज्यों की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी अधिक चिंताजनक है। असम में प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का रिटेंशन रेट करीब 80 प्रतिशत है, जबकि 12वीं तक यह घटकर केवल 33 प्रतिशत रह जाता है। यानी दो-तिहाई से अधिक छात्राएं स्कूल शिक्षा पूरी नहीं कर पातीं। यह देश में सबसे खराब स्थिति वाले राज्यों में शामिल है।

उत्तर प्रदेश में भी तस्वीर चिंताजनक है। यहां प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का रिटेंशन रेट लगभग 87 प्रतिशत है, लेकिन 12वीं तक आते-आते यह घटकर 45 प्रतिशत रह जाता है। यानी आधे से अधिक छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। बिहार में भी लगभग यही स्थिति देखने को मिलती है। यहां प्राथमिक स्तर पर छात्राओं का रिटेंशन रेट 90 प्रतिशत है, जबकि 12वीं तक यह घटकर 45 प्रतिशत रह जाता है।दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) रिपोर्ट में उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, देश में उच्च शिक्षा में छात्राओं का कुल नामांकन लगभग 4.5 करोड़ तक पहुंच गया है, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, स्कूल स्तर पर बड़ी संख्या में लड़कियों का पढ़ाई छोड़ देना इस उपलब्धि के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

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