कश्मीरी पंडितों को आतंकी संगठनों की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; जमात नेटवर्क पर भी छापेमारी

कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और घाटी लौटे पंडित परिवारों को धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए धमकी भरे संदेशों की जांच की जा रही है। प्रशासन ने पंडित कर्मचारियों के लिए 20 अगस्त तक वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की है।

Knews Desk- जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को लेकर सामने आई धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे कुछ छद्म संगठनों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और वापस लौटे पंडित समुदाय को निशाना बनाया है।

सुरक्षा एजेंसियां इन धमकी भरे संदेशों के स्रोत और उनकी विश्वसनीयता की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी संगठनों से जुड़े प्रचार नेटवर्क के जरिए डर का माहौल बनाने और कश्मीरी पंडितों की वापसी व पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट से जुड़े बताए जा रहे एक प्रचार प्लेटफॉर्म ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरे संदेश प्रसारित किए हैं। इनमें कुछ लोगों के नाम और संपर्क नंबर भी साझा किए गए हैं।

धमकी भरे संदेशों में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने के लिए स्थानीय लोगों को उकसाने की कोशिश की गई है। साथ ही, उनकी मदद करने वालों को भी धमकी दी गई है।

इसके अलावा ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ यानी ULC नाम के एक संगठन की ओर से भी कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह संगठन भी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक छद्म संगठन हो सकता है।

ULC की कथित हिट लिस्ट में सरकारी योजनाओं से जुड़े कुछ कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल होने की बात सामने आई है। संदेशों में कश्मीर घाटी के साथ-साथ जम्मू क्षेत्र में भी हमले की धमकी दी गई है।

20 अगस्त तक वर्क फ्रॉम होम

धमकियों को देखते हुए कश्मीर में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की ओर से उन्हें 20 अगस्त तक वर्क फ्रॉम होम या जरूरत के मुताबिक लचीली कार्य व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे पोस्ट और संदेशों पर नजर रख रही हैं। साइबर सेल इन डिजिटल अभियानों के पीछे सक्रिय लोगों और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

ट्रांजिट कैंपों और पंडित कर्मचारियों की रिहायशी जगहों पर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एजेंसियों को आशंका है कि आतंकी समर्थक नेटवर्क हाइब्रिड और स्थानीय ऑपरेटरों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

मनोवैज्ञानिक अभियान का हिस्सा मान रही एजेंसियां

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की धमकियों का मकसद सिर्फ किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर भय का माहौल पैदा करना भी हो सकता है। एजेंसियां इसे मनोवैज्ञानिक अभियान के तौर पर देख रही हैं, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना और कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की कोशिशों को प्रभावित करना हो सकता है।

इसी को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां खतरे का आकलन कर रही हैं और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए जा रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी नेटवर्क पर भी शिकंजा

दूसरी ओर, प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ भी सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर यानी CIK की ओर से पांच जिलों में एक साथ तलाशी अभियान चलाए जाने के अगले दिन जम्मू-कश्मीर पुलिस ने CRPF के सहयोग से कई स्थानों पर छापेमारी की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोपोर और आसपास के इलाकों में करीब 26 ठिकानों पर सुबह के समय तलाशी ली गई। यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन से जुड़े UAPA मामले की जांच के तहत की गई।

तलाशी अभियान का उद्देश्य नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना तथा संभावित सबूत हासिल करना था। पुलिस की कार्रवाई के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ और कितने लोगों से पूछताछ की गई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *