छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, निर्दोष छात्रों को राहत; आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर कार्रवाई जारी

Knews Desk- छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि जंतर-मंतर समेत देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों में शामिल निर्दोष छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए जाएंगे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन छात्रों के लिए है जिनका किसी गंभीर आपराधिक गतिविधि से संबंध नहीं है। अदालत ने नाबालिगों और निर्दोष लोगों को तत्काल रिहा करने के भी निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश जानकारी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पहचाने गए 2,873 प्रदर्शनकारियों में से 989 लोगों का आपराधिक इतिहास सामने आया है। इन पर हत्या, डकैती, लूट, अपहरण, यौन अपराध समेत कई गंभीर मामलों में पहले से केस दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

पुलिस कार्रवाई की होगी निष्पक्ष जांच

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और हिंसा प्रभावित अन्य राज्यों को भी अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है।

पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। अदालत के अनुसार, यदि छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखते हैं तो उसे संवैधानिक दायरे में माना जाएगा। साथ ही, विरोध के दौरान हुई किसी भी तरह की कथित हिंसा या बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी मामलों को एक साथ जोड़ते हुए उनकी अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है।

अदालत ने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए पुलिस को सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इसमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार, पीसीआर कॉल रिकॉर्ड और प्रदर्शनकारियों से संबंधित डिजिटल डेटा शामिल है, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में इनका उपयोग किया जा सके।