अजमेर सेंट्रल जेल से सामने आए एक वीडियो ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में जेलर सद्दाम हुसैन के ऑफिस में बंद कैदी उनके मोबाइल फोन से नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। नफीस चिश्ती 1992 के चर्चित अजमेर ब्लैकमेलिंग कांड का मास्टरमाइंड बताया जाता है।
Knews Desk- अजमेर सेंट्रल जेल से सामने आए एक वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है। वीडियो में जेल में मौजूद तीन कैदियों को जेलर सद्दाम हुसैन के मोबाइल फोन के जरिए नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत करते देखा जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि पूरी बातचीत जेलर के ऑफिस में कराई गई।
वीडियो में तारिक चिश्ती, उसका बेटा तौसीफ चिश्ती उर्फ चिंकी और भांजा फखर जमाली नफीस चिश्ती से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। तीनों को हाजी सैयद बिलाल हुसैन चिश्ती पर 2014 में हुए जानलेवा हमले के मामले में वर्ष 2025 में सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा के फैसले को बरकरार रखा था। बताया गया है कि फिलहाल तारिक और फखर जमानत पर बाहर हैं, जबकि तौसीफ अजमेर जेल में बंद है।
जेलर के ऑफिस से कराई गई वीडियो कॉल
सामने आए वीडियो में जेलर सद्दाम हुसैन अपने कार्यालय में बैठे नजर आते हैं। उनके आसपास कैदी मौजूद हैं और जेलर अपने मोबाइल फोन के जरिए उनकी नफीस चिश्ती से वीडियो कॉल पर बातचीत करवाते दिखाई दे रहे हैं।
कॉल शुरू होते ही नफीस चिश्ती और जेलर सद्दाम के बीच बातचीत होती है। नफीस तारिक चिश्ती के बारे में पूछता है। इसके बाद जेलर मोबाइल का कैमरा तारिक की तरफ कर देता है। दोनों के बीच बातचीत होने लगती है।
नफीस चिश्ती कहता है कि वह सद्दाम से तारिक के बारे में पूछता रहता है और उससे तारिक का ध्यान रखने के लिए कहता है। इसके बाद वह चिंकी और फखर के बारे में पूछता है। जेलर मोबाइल कैमरा उनकी तरफ कर देता है और दोनों की भी नफीस से बातचीत कराता है।
बातचीत में कई लोगों का जिक्र
वीडियो कॉल के दौरान तारिक चिश्ती नफीस से कहता है कि चिंता की कोई बात नहीं है और वे ठीक हैं। बातचीत में रमीज, सरवर और मसूद समेत कुछ अन्य लोगों का भी जिक्र होता है।
नफीस बातचीत के दौरान भरोसा दिलाता नजर आता है कि बाकी काम वह करवा देगा। वह यह भी कहता है कि उसने सद्दाम से बातचीत के संबंध में बात की थी और सद्दाम ने भी व्यवस्था करने की बात कही थी। बातचीत के दौरान नफीस अपने पास मौजूद हनीफ नाम के व्यक्ति से भी तीनों कैदियों की बातचीत करवाता है।
आखिर में जेलर ने कहा- ‘ओके चाचा’
वीडियो के अंत में बातचीत खत्म होने के बाद जेलर सद्दाम हुसैन नफीस चिश्ती से कहते हैं, ‘ओके चाचा।’ इसके बाद नफीस जेलर का शुक्रिया अदा करता है।
वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेल के अंदर बंद कैदियों को निजी मोबाइल फोन से बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल करने की अनुमति कैसे मिली और जेलर के कार्यालय में यह बातचीत किस आधार पर कराई गई।
जेल अधीक्षक ने क्या कहा?
अजमेर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक आर. अंतेश्वरन ने बताया कि उन्हें इस वीडियो की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उनके मुताबिक वीडियो कुछ समय पुराना है। इसमें जेलर सद्दाम हुसैन अपने मोबाइल फोन से जेल में बंद कैदियों की बाहर मौजूद लोगों से बातचीत करवाते नजर आ रहे हैं।
जेल अधीक्षक ने माना कि मामला जेल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जेल डीजी से चर्चा की गई है। मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
कौन है नफीस चिश्ती?
वीडियो कॉल में जिस नफीस चिश्ती से कैदियों की बातचीत कराई गई, उसका नाम 1992 के चर्चित अजमेर ब्लैकमेलिंग कांड से जुड़ा रहा है। उसे इस मामले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। रिहाई के बाद भी उसका नाम अलग-अलग आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है।
करीब आठ साल पहले तत्कालीन एसपी विकास कुमार की विशेष पुलिस टीम ने नफीस चिश्ती के घर पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में करीब 5.20 करोड़ रुपये का सट्टा पकड़े जाने की बात सामने आई थी। इसके अलावा 24 करोड़ रुपये की स्मैक तस्करी के एक मामले में गुजरात पुलिस ने नफीस चिश्ती और फारुख चिश्ती को आरोपी माना था।
जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अजमेर सेंट्रल जेल से सामने आए इस वीडियो ने जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों को मिलने वाली कथित विशेष सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जेल में बंद कैदियों को जेलर के निजी मोबाइल फोन से बाहरी व्यक्ति से वीडियो कॉल कराए जाने की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जेल के भीतर मोबाइल और संचार व्यवस्था को लेकर निर्धारित नियमों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था।
अब जेल प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की बात कही गई है। ऐसे में जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि वीडियो कब का है, कैदियों को यह सुविधा किसके निर्देश पर दी गई और इस पूरे मामले में जेल प्रशासन की भूमिका क्या थी।