Knews Desk- बिहार में अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस और STF की कार्रवाई लगातार जारी है। जनवरी 2026 से अब तक राज्य में 33 मिनी गन फैक्ट्रियों का पता लगाया जा चुका है। यानी औसतन हर सात दिन में एक अवैध हथियार बनाने वाली यूनिट का खुलासा हुआ है। इन कार्रवाइयों में बड़ी संख्या में देसी हथियारों के साथ अत्याधुनिक राइफलें और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
STF के मुताबिक, इस दौरान 398 देसी हथियार, एक AK-47 और दो INSAS राइफलें बरामद की गई हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में कारतूस जब्त हुए हैं। इसी अवधि में STF ने 19 मुठभेड़ों के दौरान 1,716 अपराधियों को गिरफ्तार किया, जबकि 350 से ज्यादा सुपारी किलरों को भी पकड़ा गया।
STF की कार्रवाई में पूर्णिया, खगड़िया, बेगूसराय, गया और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में अवैध हथियार बनाने से जुड़े मामले सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि मिनी गन फैक्ट्रियों का नेटवर्क अब सिर्फ मुंगेर जैसे पारंपरिक हथियार निर्माण वाले इलाकों तक सीमित नहीं है।
खगड़िया के मानसी इलाके में STF, DIU और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक मिनी गन फैक्ट्री पकड़ी गई। यहां हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पूर्णिया में जमीन के 20 फीट नीचे चल रही थी फैक्ट्री
सबसे चौंकाने वाला मामला पूर्णिया जिले का सामने आया। मई 2026 में धमदाहा के हरिपुर गांव में STF ने जमीन से करीब 20 फीट नीचे चल रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री का पता लगाया।
पुलिस के अनुसार, यहां लेथ मशीन लगाई गई थी, ताकि हथियार बनाने के दौरान होने वाली आवाज बाहर तक न पहुंच सके। छापेमारी के दौरान अधबने पिस्टल, मशीन और हथियार तैयार करने से जुड़ा सामान बरामद किया गया। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि यहां तैयार किए जा रहे हथियारों की सप्लाई बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल तक किए जाने की बात सामने आई। इससे अवैध हथियार कारोबार के अंतरराज्यीय कनेक्शन का भी पता चलता है।
पूर्वी चंपारण में कारतूस बनाने की यूनिट का खुलासा
जुलाई 2026 में पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध कारतूस बनाने से जुड़ी एक यूनिट का पर्दाफाश किया। कार्रवाई के दौरान 500 से अधिक बने और अधबने कारतूस बरामद किए गए।
पुलिस को मौके से कारतूस बनाने वाली मशीनें, मेटल शीट, गन पाउडर और अन्य सामग्री भी मिली। इस मामले में चार लोगों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई बताती है कि अवैध हथियारों का कारोबार केवल पिस्टल और कट्टे बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कारतूस तैयार करने के लिए भी अलग-अलग ठिकानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
खेत और बगीचों में छिपाकर चल रही फैक्ट्रियां
बेगूसराय के बलिया इलाके में खेतों के बीच चल रही एक मिनी गन फैक्ट्री भी पुलिस के हाथ लगी। वहीं खगड़िया के मानसी थाना क्षेत्र में रेलवे गुमटी के पास एक बगीचे में हथियार बनाने की यूनिट का पता चला।
इन मामलों को पूर्णिया की भूमिगत फैक्ट्री के साथ जोड़कर देखें तो एक खास पैटर्न नजर आता है। अवैध हथियार बनाने वाले ठिकाने अक्सर भीड़भाड़ वाले औद्योगिक इलाकों के बजाय खेतों, बगीचों, ग्रामीण क्षेत्रों और जमीन के नीचे बनाए जा रहे हैं, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
कौन सा जिला है सबसे बड़ा हॉटस्पॉट?
बिहार STF ने अब तक 33 मिनी गन फैक्ट्रियों का कुल आंकड़ा जारी किया है, लेकिन इनका विस्तृत जिला-वार ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल किसी एक जिले को अवैध हथियार निर्माण का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट कहना सही नहीं होगा।
हालांकि, 2026 में पूर्णिया, खगड़िया, बेगूसराय, गया और पूर्वी चंपारण में अवैध हथियार निर्माण से जुड़े मामले सामने आए हैं। उपलब्ध घटनाओं से इतना जरूर स्पष्ट है कि बिहार में मिनी गन फैक्ट्रियों का नेटवर्क कई जिलों तक फैल चुका है और इसके तार दूसरे राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।
फिलहाल जिला-वार आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिहार में सबसे ज्यादा मिनी गन फैक्ट्रियां आखिर किस जिले में पकड़ी गई हैं।