Abhishek Sharma: अभिषेक शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह मांग की है कि उनकी सहमति के बिना उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल AI से जुड़ी चीजों में न किया जाए. आइए जानते हैं पूरा मामला…
knews desk- टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा इस समय दो अलग-अलग वजहों से सुर्खियों में हैं. एक ओर वह इंग्लैंड दौरे पर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से प्रभावित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए बनाई गई कथित फर्जी तस्वीरों और वीडियो को लेकर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
अभिषेक शर्मा ने अपनी पहचान, नाम और तस्वीरों का बिना अनुमति गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. यह मामला जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच के समक्ष पहुंचा, जहां खिलाड़ी की ओर से सोशल मीडिया और विभिन्न वेबसाइटों के उन लिंक की सूची पेश की गई, जिनके जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.
सुनवाई में अदालत ने जताई चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स के बीच की सीमा लगातार धुंधली होती जा रही है. अदालत ने टिप्पणी की कि कई मामलों में दोनों पहलू एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, क्योंकि मानहानिकारक सामग्री में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन भी शामिल हो सकता है.
कोर्ट फिलहाल इस पहलू पर विचार कर रही है कि विवादित ऑनलाइन सामग्री केवल आपत्तिजनक पोस्ट है या फिर AI तकनीक का इस्तेमाल कर अभिषेक शर्मा की पहचान का अनुचित लाभ उठाया गया है.
अभिषेक की ओर से क्या कहा गया?
अभिषेक शर्मा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ठाकुर ने अदालत को बताया कि यह केवल किसी तस्वीर के इस्तेमाल का मामला नहीं है. उनके अनुसार, अभिषेक और उनके मैनेजर की एक वास्तविक तस्वीर को AI टूल की मदद से बदलकर उसका संदर्भ पूरी तरह बदल दिया गया और उसे सोशल मीडिया पर इस तरह साझा किया गया कि उससे भ्रामक संदेश जाए. वकील ने इसे खिलाड़ी की पहचान और छवि का गलत इस्तेमाल बताया.
मेटा ने रखा अपना पक्ष
मेटा की ओर से पेश अधिवक्ता वरुण पाठक ने अदालत को बताया कि शुरुआती आठ यूआरएल में से दो पहले ही हटाए जा चुके हैं, जबकि बाकी लिंक सामान्य पैपराजी पोस्ट जैसे दिखाई देते हैं. उन्होंने दलील दी कि किसी व्यक्ति के बारे में गलत या आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला मानहानि या निजता से जुड़ा हो सकता है, लेकिन उसे सीधे पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता.
मेटा की ओर से यह भी बताया गया कि शुरुआत में याचिका में करीब 25 यूआरएल शामिल थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 4,000 हो गई है. कंपनी का कहना है कि यदि पर्सनैलिटी राइट्स की व्याख्या अत्यधिक व्यापक कर दी गई तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसे मामलों को संभालना बेहद कठिन हो जाएगा. इससे केवल आलोचनात्मक सामग्री को भी हटाने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
9 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई के लिए निर्धारित की है. अदालत ने कहा कि याचिका से जुड़े कुछ तकनीकी पहलुओं पर अभी और विचार किए जाने की आवश्यकता है.
मैदान पर भी जारी है शानदार प्रदर्शन
कानूनी विवाद के बीच अभिषेक शर्मा का प्रदर्शन भी लगातार चर्चा में है. इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में उन्होंने 59 रन बनाए थे, जबकि दूसरे मैच में 24 गेंदों पर 48 रन की तेज पारी खेली, जिसमें आठ चौके और एक छक्का शामिल रहा. अब तीसरे टी20 मुकाबले में भी उनसे एक और आक्रामक पारी की उम्मीद की जा रही है.