KNEWS DESK- तमिलनाडु में स्कूल और कॉलेज के छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए जारी किया गया आदेश महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया गया। विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार के तहत कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय (DCE) ने मंगलवार को अपने पिछले निर्देश को वापस लेने की जानकारी दी।
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने मंगलवार को आदेश जारी कर बताया कि 17 अगस्त को जारी किया गया पिछला निर्देश वापस ले लिया गया है। यह आदेश राज्यभर के सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को भेजा गया था। आदेश में छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में हिस्सा लेने से रोकने के लिए कदम उठाने को कहा गया था। बताया गया कि DCE की ओर से जारी इन निर्देशों के पीछे राजनीतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों को लेकर चिंता थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब राज्य में छात्रों की भागीदारी और उनके विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज हो रही है।
‘छात्रों को प्रदर्शन का मौलिक अधिकार’
इस बीच, पिछले सप्ताह चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने छात्र गतिविधियों में अपनी भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा था कि छात्रों को विरोध करने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा था कि किसी छात्र की राय गलत हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे अपनी बात रखने या विरोध करने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और कैंपस में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच आया था आदेश
छात्रों को विरोध से दूर रखने वाला यह निर्देश ऐसे समय जारी हुआ था, जब राज्य में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी ने 15 अगस्त से इस अभियान को शुरू किया था।
इसी दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में Gen Alpha के स्कूली छात्रों की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन किए जाने की घटनाएं भी सामने आ रही थीं। ऐसे माहौल में तमिलनाडु के कॉलेजों के लिए जारी निर्देश ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया।
आदेश वापस लेने के बाद स्थिति साफ
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय तमिलनाडु के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करता है और राज्य के सरकारी आर्ट्स एवं साइंस कॉलेजों की निगरानी करता है। अब 17 अगस्त का निर्देश वापस लिए जाने के बाद कॉलेजों को छात्रों के प्रदर्शन को लेकर पहले जारी किए गए निर्देशों का पालन नहीं करना होगा।
सरकार के इस फैसले को छात्रों की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों के बीच अहम माना जा रहा है। फिलहाल आदेश वापस लेने के बाद सरकार की ओर से इस संबंध में आगे कोई नया निर्देश जारी होता है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।