बम ब्लास्ट मामले में पुलिस ने अहमदाबाद और सूरत में FIR दर्ज की थी। इस केस से जुड़े 6,000 डॉक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश किए गए। वहीं 3 लाख 47 हजार 800 पेज की 547 चार्जशीट तैयार की गई थीं।
Knews Desk- 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट में हुए 21 बम धमाकों ने अहमदाबाद को दहला दिया था। शहर भर में हुए इन धमाकों में 56 लोगों की जान गई, जबकि 200 लोग घायल हुए थे। धमाकों की जांच-पड़ताल कई साल चली और करीब 80 आरोपियों पर मुकदमा चला।
इस मामले में जांच एजेंसियों ने आतंकी साजिश का खुलासा करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 दोषियों को सजा सुनाई थी। इनमें से कई को फांसी और कई को उम्रकैद की सजा दी गई। यह फैसला देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में से एक के रूप में देखा गया।
लॉकडाउन के दौरान चली थी सुनवाई
अहमदाबाद विस्फोट के बाद करीब 12 साल तक इस मामले की जांच और सुनवाई चली थी। लॉकडाउन के दौरान भी इस मामले की सुनवाई लगातार चलती रही। देश में पहली बार एकसाथ 49 आरोपियों को आतंकवाद के गुनाह में दोषी ठहराया गया था।
केस से जुड़े 6000 डॉक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश किए गए थे
2009 में ट्रायल तब शुरू हुए, जब करीब 35 केसों को मिलाकर एक बड़ा केस बनाया गया। अहमदाबाद में ब्लास्ट वाली लोकेशन में और सूरत में जहां पुलिस को बम मिले, वहां FIR दर्ज कराई गईं। लंबे चले मुकदमे में कई मोड़ आए।
प्रॉसिक्यूशन ने जज एआर पटेल के सामने 1,100 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की थी। केस से जुड़े 6000 डॉक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश किए गए थे। 3,47,800 पेज की 547 चार्जशीट तैयार की गई थी। अकेले प्राइमरी चार्जशीट ही 9800 पेज की रही।
ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ था
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) और बैन किए गए स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े लोगों ने ब्लास्ट कराए थे। पुलिस का मानना था कि IM के आतंकियों ने 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के जवाब में ये धमाके किए।