KNews Desk: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सतना जिले में भारी बारिश के बाद बाढ़ ने तबाही मचा दी है। पिछले 20 से 24 घंटे से हो रही लगातार बारिश और मानिकपुर स्थित डोडा डैम के ओवरफ्लो होकर टूटने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं और घरों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि यह 2003 के बाद चित्रकूट में आई सबसे भीषण बाढ़ है। रामघाट और भरतघाट समेत निचले इलाकों में 400 से ज्यादा मकान और दुकानें बाढ़ के पानी से प्रभावित हुई हैं। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण कई परिवारों को अपना घर छोड़कर छतों पर शरण लेनी पड़ी।
750 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय सेना के दो हेलिकॉप्टरों के साथ NDRF और SDRF की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, करीब 750 लोगों को छतों और जलमग्न इमारतों से सुरक्षित निकाला गया। कई लोगों को नावों के जरिए भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रमोद वन, विकास प्राधिकरण, मदन गोपाल और गायत्री पीठ में राहत शिविर बनाए गए हैं। यहां लोगों के लिए भोजन और सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
डोडा डैम टूटने से रेल ट्रैक जलमग्न
डोडा डैम टूटने का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। मानिकपुर के पास चितहरा रेलवे स्टेशन के नजदीक सतना-मानिकपुर रेलखंड की पटरियां पानी में डूब गईं। ट्रैक पर करीब तीन फीट से ज्यादा पानी भरने की जानकारी सामने आई है।
इस दौरान एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें रेलकर्मी घुटनों तक पानी में उतरकर ट्रैक की स्थिति जांचते दिखाई दे रहे हैं। एक कर्मचारी लाल झंडी लेकर ट्रेन के आगे चलता नजर आया, जबकि ट्रेन बेहद धीमी गति से पानी के बीच आगे बढ़ रही थी।
कई रास्तों पर आवाजाही बंद
बाढ़ के कारण चित्रकूट को नयागांव से जोड़ने वाले मुख्य पुल को भी नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा के मद्देनजर PWD ने कई मार्गों पर बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी है। इनमें सतना-अटरा, सभापुर-नयागांव, पिंडरा-नकैला-बरौंदा और मझगवां-पटना-पहाड़ी मार्ग शामिल हैं।
आरोग्यधाम, गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया आश्रम और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग में भी जलभराव के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
सीएम ने लिया बाढ़ का जायजा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को पानी उतरने के बाद घर-घर सर्वे कराने और जनहानि, मकान व पशुहानि का आकलन कर मुआवजा देने के निर्देश दिए।
फिलहाल मंदाकिनी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, बाढ़ के बाद जमा कीचड़, क्षतिग्रस्त मकान-दुकानें और बर्बाद सामान को साफ करना प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।