Knews Desk- अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी पुरानी प्रॉपर्टी, जमीन, सोना या कोई अन्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेचने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (Cost Inflation Index-CII) को बढ़ाकर 376 से 384 कर दिया है। यह बदलाव महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किया गया है और इससे योग्य मामलों में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) की गणना करते समय टैक्स का बोझ कम हो सकता है।कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स वह इंडेक्स है, जिसका उपयोग किसी संपत्ति की खरीद लागत को महंगाई के अनुसार समायोजित (Indexation) करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टैक्स केवल वास्तविक लाभ (Real Gain) पर लगे, न कि केवल महंगाई के कारण बढ़ी हुई कीमत पर। हर साल CBDT आयकर अधिनियम, 1961 के तहत इस इंडेक्स को अधिसूचित करता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में CII का आंकड़ा 376 था, जिसे अब FY 2026-27 के लिए 384 कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा उन करदाताओं को मिलेगा जो ऐसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट बेच रहे हैं, जिन पर मौजूदा कर नियमों के तहत इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध है। इंडेक्स बढ़ने से संपत्ति की इंडेक्स्ड खरीद लागत बढ़ जाती है, जिससे टैक्सेबल कैपिटल गेन कम हो सकता है और परिणामस्वरूप टैक्स देनदारी भी घट सकती है।कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का लाभ मुख्य रूप से योग्य लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट्स पर मिलता है। इनमें अचल संपत्ति (मकान, फ्लैट, प्लॉट), सोना और अन्य आभूषण, तथा कुछ श्रेणी की सिक्योरिटीज शामिल हो सकती हैं, जहां मौजूदा कर प्रावधान इंडेक्सेशन की अनुमति देते हैं। हालांकि, किन परिसंपत्तियों पर यह लाभ उपलब्ध होगा, यह उस समय लागू आयकर नियमों पर निर्भर करता है।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट की परिभाषा भी संपत्ति के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर अचल संपत्ति और अनलिस्टेड शेयर 24 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग-टर्म एसेट माने जाते हैं। वहीं, लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए यह अवधि आमतौर पर 12 महीने होती है, जबकि अन्य कई पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिए 36 महीने की होल्डिंग अवधि लागू हो सकती है।उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति ने कई वर्ष पहले एक संपत्ति खरीदी थी और अब उसे बेच रहा है, तो इंडेक्सेशन के जरिए उसकी खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से बढ़ाकर माना जाता है। इससे बिक्री मूल्य और समायोजित खरीद मूल्य के बीच का अंतर कम हो सकता है, जिसके कारण लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन घटता है और टैक्स भी कम देना पड़ता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर संपत्ति और हर लेनदेन पर इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध नहीं होता। हाल के वर्षों में सरकार ने पूंजीगत लाभ कर से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए हैं। इसलिए यह लाभ आपकी संपत्ति के प्रकार, उसकी खरीद की तारीख और उस समय लागू कर प्रावधानों पर निर्भर करेगा।कर विशेषज्ञों का मानना है कि जिन मामलों में इंडेक्सेशन लागू होता है, वहां नया CII करदाताओं के लिए राहत लेकर आया है। यदि आप इस वित्तीय वर्ष में कोई लॉन्ग-टर्म एसेट बेचने की योजना बना रहे हैं, तो पूंजीगत लाभ की गणना करने से पहले नए CII 384 का सही उपयोग करना और आवश्यकता पड़ने पर किसी कर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। इससे आप मौजूदा नियमों के अनुसार अपनी टैक्स देनदारी का सही आकलन कर सकेंगे।