Knews Desk– भारत में शराब बनाने वाली कंपनियों के लिए नियमों को लेकर सरकार की सख्ती लगातार बढ़ रही है. इसी बीच मैकडॉवेल्स बनाने वाली कंपनी डियाजियो ने अपने कुछ लोकप्रिय शराब उत्पादों के फॉर्मूले में बदलाव करने का फैसला किया है. कंपनी और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के बीच शराब में इस्तेमाल होने वाले कुछ फ्लेवरिंग एजेंट को लेकर चल रहा विवाद अब समझौते के जरिए सुलझ गया है. इसके बाद मैकडॉवेल्स नंबर 1 समेत प्रभावित ब्रांड्स की बिक्री में आ रही अड़चनें दूर होने की उम्मीद है.
दरअसल, FSSAI ने शराब में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास फ्लेवरिंग एजेंट को लेकर आपत्ति जताई थी. रेगुलेटर की ओर से इन सामग्रियों के इस्तेमाल और उनकी लेबलिंग को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया गया. इसका असर यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड के लोकप्रिय ब्रांड मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम पर भी पड़ा. कंपनी के इस उत्पाद पर पाबंदी का खतरा मंडराने लगा था.
शुरुआत में डियाजियो की भारतीय इकाई ने FSSAI की कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था. कंपनी का तर्क था कि उसके खिलाफ कार्रवाई करते समय जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. हालांकि, अब कंपनी ने लंबे कानूनी विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय अपने उत्पाद के फॉर्मूले में बदलाव करने का रास्ता चुना है. FSSAI के साथ हुए समझौते के तहत उन फ्लेवरिंग सामग्रियों को उत्पाद से हटाया जाएगा, जिनको लेकर नियामक ने आपत्ति जताई थी.फॉर्मूले में बदलाव का सीधा असर शराब के स्वाद पर भी पड़ सकता है. फ्लेवरिंग एजेंट हटाए जाने के बाद मैकडॉवेल्स रम का स्वाद पहले की तुलना में थोड़ा अलग महसूस हो सकता है. हालांकि, बदलाव कितना बड़ा होगा, यह नए फॉर्मूले और उसमें इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्रियों पर निर्भर करेगा. इसके साथ ही कंपनी को बोतलों पर लगे लेबल में भी जरूरी बदलाव करने होंगे, ताकि उत्पाद नए नियमों के अनुरूप हो सके. इससे ग्राहकों को शराब में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से जुड़ी जानकारी भी ज्यादा स्पष्ट तरीके से मिल सकेगी.
इस समझौते के बाद प्रभावित ब्रांड्स पर लगी या प्रस्तावित पाबंदी हटने का रास्ता भी साफ हो गया है. इससे कंपनी को भारतीय बाजार में अपने लोकप्रिय उत्पादों की बिक्री सामान्य तरीके से जारी रखने में मदद मिलेगी. भारत डियाजियो के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है, इसलिए कंपनी के लिए नियामकीय नियमों का पालन करना काफी अहम है.यह पूरा मामला शराब की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की निगरानी को लेकर FSSAI की बढ़ती सख्ती को भी दिखाता है. रेगुलेटर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बाजार में बिकने वाली शराब निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो. साथ ही, बोतलों पर सही और स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि ग्राहकों को उत्पाद के बारे में पर्याप्त जानकारी मिल सके.
डियाजियो के सामने सिर्फ फ्लेवरिंग का मामला ही चुनौती नहीं है. हाल ही में अधिकारियों ने कंपनी की करीब 18 हजार शराब की पेटियां भी जब्त की थीं. यह कार्रवाई प्लास्टिक पैकेजिंग से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई थी. रिसाइकल्ड प्लास्टिक की मार्किंग और नियमों के पालन में लापरवाही के आरोप सामने आए थे.हालांकि पैकेजिंग से जुड़ा यह मामला फ्लेवर विवाद से अलग है, लेकिन दोनों घटनाएं बताती हैं कि शराब उद्योग पर नियामकीय निगरानी पहले के मुकाबले काफी सख्त हो गई है. कंपनियों के लिए अब सिर्फ शराब की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उसके निर्माण, इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, पैकेजिंग और लेबलिंग से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी हो गया है. मैकडॉवेल्स के मामले में भी अब नया फॉर्मूला और बदली हुई लेबलिंग इसी दिशा में कंपनी का अगला कदम होगी.