Knews Desk- अगर आपकी चाय बिस्किट के बिना अधूरी रहती है, तो आने वाले दिनों में आपको इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. देश की बड़ी बिस्किट कंपनी ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने अपने उत्पादों की कीमत बढ़ाने और कुछ पैकेट्स का वजन घटाने का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि कच्चे माल और ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत की वजह से यह कदम उठाना पड़ रहा है.
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने निवेशकों के साथ बातचीत में बताया कि इस तिमाही से बिस्किट की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाएगी. खासतौर पर 10 रुपये से ऊपर वाले पैकेट्स महंगे हो सकते हैं. वहीं 5 और 10 रुपये वाले छोटे पैकेट्स की कीमत फिलहाल नहीं बढ़ाई जाएगी, लेकिन उनमें मिलने वाले बिस्किट की मात्रा कम की जा सकती है.

क्यों बढ़ रही है लागत
ब्रिटानिया के अनुसार, पाम ऑयल, पैकेजिंग मटेरियल, ईंधन और मालभाड़े की लागत लगातार बढ़ रही है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ गया है. इसका असर भारत की खाद्य कंपनियों पर भी पड़ रहा है
हालांकि गेहूं की कीमतों में कुछ राहत मिली है, लेकिन बाकी लागत इतनी बढ़ चुकी है कि कंपनियों के लिए मुनाफा बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. कंपनी ने बताया कि अगले कुछ महीनों के लिए पाम ऑयल की सप्लाई पहले से तय कर ली गई है, ताकि अचानक कीमत बढ़ने का असर कम हो सके.

अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी प्रभावित
ब्रिटानिया का विदेशी कारोबार भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कंपनी को निर्यात में परेशानी हुई. मालवाहक जहाजों की कमी के कारण कई उत्पाद समय पर विदेश नहीं भेजे जा सके. इसी वजह से कंपनी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही है. साथ ही सप्लाई चेन सुधारने के लिए कुछ उत्पादन इकाइयों को ओमान से वापस भारत के मुंद्रा पोर्ट क्षेत्र में शिफ्ट किया जा रहा है.

छोटे पैकेट्स पर ज्यादा फोकस
ब्रिटानिया की कुल बिक्री का बड़ा हिस्सा 5 और 10 रुपये वाले पैकेट्स से आता है. कंपनी का मानना है कि ग्रामीण और छोटे बाजारों में किफायती पैकेट्स की मांग सबसे ज्यादा रहती है. फिलहाल कंपनी कीमत स्थिर रखते हुए वजन कम करने की रणनीति पर काम कर रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य खाद्य कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं, जिससे रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं.