Knews Desk: भारत की अर्थव्यवस्था इस समय तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। देश की GDP ग्रोथ रेट 7.8 फीसदी दर्ज की गई है। इसके बावजूद cकी ओर से विदेश यात्रा, विदेशों में शादियां और गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जब देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो सरकार विदेशी खर्च को कम करने पर जोर क्यों दे रही है। इसी सवाल का जवाब देते हुए Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने प्रधानमंत्री की अपील को विदेशी मुद्रा बचाने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत से जोड़कर समझाया है।
श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था भले ही तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन देश अभी भी ऊर्जा और टेक्नोलॉजी के लिए आयात पर काफी निर्भर है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ता है, वैसे-वैसे ऊर्जा और तकनीकी संसाधनों की जरूरत भी बढ़ती है। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को विदेशों से कई चीजें खरीदनी पड़ती हैं, जिसके लिए विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखना आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।वेम्बू ने एक यूजर की X पोस्ट का जवाब देते हुए अपनी बात रखी। यूजर ने पूछा था कि अगर भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ रही है तो प्रधानमंत्री लोगों से विदेश यात्रा न करने, विदेशों में शादी न करने और सोना न खरीदने की अपील क्यों कर रहे हैं। इसके जवाब में वेम्बू ने पूर्वी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं का उदाहरण दिया। उन्होंने जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और बाद में चीन का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों ने भी तेज आर्थिक विकास के दौर में विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत का सामना किया था।
वेम्बू के अनुसार, भारत के लिए आयात पर निर्भरता को संतुलित करने के लिए निर्यात बढ़ाना जरूरी है। देश का एक्सपोर्ट बढ़ रहा है, लेकिन कई एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज खुद ऐसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं, जिन्हें विदेशों से आयात करना पड़ता है। इनमें प्रिसिजन मशीनें, विशेष मटीरियल, CPU, GPU और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर जैसी तकनीकें शामिल हैं। इसका मतलब है कि भारत को निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ टेक्नोलॉजी से जुड़े आयात पर अपनी निर्भरता भी धीरे-धीरे कम करनी होगी।श्रीधर वेम्बू का मानना है कि एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता हासिल करना आसान या जल्दी पूरा होने वाला लक्ष्य नहीं है। इसमें दशकों का समय लग सकता है। उन्होंने जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन का उदाहरण देते हुए बताया कि इन देशों को पश्चिमी देशों की तकनीकी और आर्थिक बराबरी तक पहुंचने में लंबा समय लगा। भारत ने इस दिशा में अच्छी शुरुआत की है, लेकिन उसे आगे बढ़ने के लिए लगातार निवेश और तकनीकी क्षमता विकसित करने की जरूरत है।
वेम्बू ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना तेजी से बढ़ रही एक कंपनी से की। उनके मुताबिक, कोई कंपनी अगर तेजी से विस्तार कर रही है तो उसे आगे के निवेश के लिए अपनी पूंजी बचाकर रखनी पड़ती है। उसी तरह भारत को भी आर्थिक विकास के इस दौर में विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। विदेश यात्रा, विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग और गैर-जरूरी सोने की खरीद जैसे खर्च विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकते हैं।वेम्बू के मुताबिक, जब भारत एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में अधिक आत्मनिर्भर हो जाएगा और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी अपनी तकनीक विकसित कर लेगा, तब विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत कम हो सकती है। फिलहाल उनका मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का मकसद आर्थिक विकास को रोकना नहीं, बल्कि तेज विकास के साथ देश की विदेशी मुद्रा और संसाधनों को सुरक्षित रखना है।