Knews Desk- दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों की सड़कों पर अब परिवहन का रंग तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। जहां पहले हर तरफ हरे रंग के सीएनजी ऑटो नजर आते थे, वहीं अब आसमानी रंग के इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-रिक्शा बड़ी संख्या में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है।
भारत में जिस इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति की उम्मीद कार बाजार से की जा रही थी, वह फिलहाल थ्री-व्हीलर सेगमेंट में सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है। यात्री ढोने वाले ऑटो से लेकर मालवाहक थ्री-व्हीलर तक अब इलेक्ट्रिक मॉडल में बदल रहे हैं। कम परिचालन लागत और बेहतर कमाई के कारण लोग तेजी से इन्हें अपना रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की बाजार हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। इसके मुकाबले सीएनजी, पेट्रोल और डीजल थ्री-व्हीलर्स की संयुक्त हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी कम रह गई है। सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत और डीजल वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 14.16 प्रतिशत दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की सफलता के पीछे कम ईंधन खर्च, आसान रखरखाव और सरकार की प्रोत्साहन नीतियां बड़ी वजह हैं। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो रोजगार और कम लागत वाले परिवहन का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। इस तेजी से बढ़ते बाजार में महिंद्रा और बजाज जैसी कंपनियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की हिस्सेदारी और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे भारत की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।