KNEWS DESK- 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, खासकर न्यूनतम बेसिक सैलरी में संभावित बढ़ोतरी को लेकर। मौजूदा समय में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन 18,000 रुपये है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर करीब 69,000 रुपये करने की मांग सामने आई है। यह प्रस्ताव नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा दिया गया है।
कमेटी ने अपने कॉमन मेमोरेंडम में 3.83 गुना बढ़ोतरी का सुझाव दिया है, जिसके लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर मांगा गया है। फिटमेंट फैक्टर वही आधार होता है जिसके जरिए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन तय होती है। अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है, तो यह अब तक की सबसे बड़ी वेतन वृद्धि में से एक हो सकती है।
इस मांग के पीछे कमेटी ने कुछ ठोस तर्क भी दिए हैं। पहला, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार, एक शारीरिक रूप से सक्रिय व्यक्ति को हर महीने लगभग 3,490 किलो कैलोरी ऊर्जा की जरूरत होती है। इसी आधार पर पांच सदस्यों वाले एक परिवार की भोजन संबंधी जरूरतों का आकलन किया गया है।
दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि 7वें वेतन आयोग में जहां परिवार की इकाई तीन सदस्यों की मानी गई थी, वहीं 8वें वेतन आयोग के लिए इसे बढ़ाकर पांच सदस्यों का मानक रखा गया है। इससे खर्च का अनुमान ज्यादा वास्तविक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप माना जा रहा है।
कमेटी ने 2025 की औसत कीमतों के आधार पर 2026 के लिए मासिक खर्च का विस्तृत अनुमान भी पेश किया है। इसके अनुसार, एक पांच सदस्यीय परिवार का केवल खाने-पीने पर करीब 26,887 रुपये खर्च होता है। इसमें कपड़े और सिलाई जैसे खर्च जोड़ने पर यह राशि बढ़कर लगभग 32,577 रुपये हो जाती है।
इसके बाद मकान किराया जोड़ने पर खर्च करीब 35,000 रुपये तक पहुंचता है, जबकि बिजली, पानी और ईंधन जैसे जरूरी खर्च शामिल करने पर यह आंकड़ा 42,000 रुपये से अधिक हो जाता है। अंत में शिक्षा, सामाजिक जरूरतें, त्योहार, मनोरंजन और तकनीकी खर्च जोड़ने के बाद कुल मासिक खर्च लगभग 68,947 रुपये आंका गया है।
इसी आधार पर कमेटी ने न्यूनतम वेतन को 69,000 रुपये तक बढ़ाने की मांग की है, ताकि कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें। हालांकि, यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।
यदि सरकार इस सिफारिश को स्वीकार करती है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर क्या फैसला लेती है।