KNEWS DESK – लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का रुख साफ करते हुए परिसीमन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में कई संसदीय सीटों पर मतदाताओं की संख्या में भारी असमानता है, जिसे ठीक करना बेहद जरूरी है।
वोट की बराबरी के लिए जरूरी परिसीमन
चर्चा के दौरान अमित शाह ने बताया कि देश में 127 सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं, जबकि कुछ सीटों पर यह संख्या काफी कम है। ऐसे में “एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य” के सिद्धांत को लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। उन्होंने कहा कि कहीं एक सांसद 45 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, तो कहीं सिर्फ 6 लाख का—यह असमानता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
महिला आरक्षण पर विपक्ष पर निशाना
महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि कुछ दल इस मुद्दे पर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार उत्तर-दक्षिण के नाम पर देश को बांटने की राजनीति को सफल नहीं होने देगी।
2029 तक लागू करने का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा और इसके बाद महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण पूरी तरह लागू हो जाए।
इंदिरा गांधी सरकार का जिक्र
अमित शाह ने इस दौरान इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1971 में सीटों को फ्रीज करने का फैसला उसी समय लिया गया था, जिसके कारण अब तक सीटों में असमानता बनी हुई है। इसी को ठीक करने के लिए वर्तमान सरकार यह कदम उठा रही है।
गृह मंत्री ने इंडी अलायंस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ दल धर्म के आधार पर आरक्षण की बात कर रहे हैं, जबकि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
बिल के तीन बड़े उद्देश्य
अमित शाह ने इस बिल के तीन मुख्य उद्देश्य गिनाए| पुराने परिसीमन की असमानताओं को दूर करना, 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करना, वोट के मूल्य में समानता लाना