24 घंटे की भूख हड़ताल के बाद भी छात्र अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी: आराध्य बाजपेयी

जंतर-मंतर पर आयोजित आमरण अनशन के समर्थन में एसएफ़आई का लोकतांत्रिक संघर्ष

शिक्षा, रोजगार एवं परीक्षा सुधार को लेकर सात सूत्रीय मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग

जंतर-मंतर पर आयोजित आमरण अनशन के समर्थन में एसएफ़आई का लोकतांत्रिक संघर्ष; शिक्षा, रोजगार एवं परीक्षा सुधार को लेकर सात सूत्रीय मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग

कानपुर, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा, रोजगार एवं छात्र अधिकारों के प्रश्नों को लेकर आयोजित आमरण अनशन के समर्थन में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफ़आई), कानपुर जिला कमेटी द्वारा आयोजित 24 घंटे की भूख हड़ताल के उपरांत संगठन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की न्यायसंगत मांगों को लेकर लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा छात्र-युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से तत्काल एवं ठोस कार्रवाई की मांग की है।

इस अवसर पर विधि छात्र, एसएफ़आई उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सदस्य एवं एसएफ़आई कानपुर जिला सह-संयोजक आराध्य बाजपेयी ने कहा कि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे मजबूत आधारशिला है। शिक्षा को बाज़ार की वस्तु नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताएँ, पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी तथा सरकारी शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा ने लाखों छात्र-युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। सरकार को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं जवाबदेह परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

आराध्य बाजपेयी ने कहा कि एसएफ़आई द्वारा उठाई गई सात सूत्रीय मांगें किसी संगठन विशेष की नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी और युवा की न्यायसंगत आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने तथा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाने चाहिए।

एसएफ़आई कानपुर की सात सूत्रीय प्रमुख मांगें

  1. शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए प्रवेश प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं एवं लापरवाही पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  2. “स्कूल बचाओ–शिक्षा बचाओ” अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों को बंद करने की नीतियाँ वापस लेकर उन्हें पर्याप्त बजट, शिक्षकों एवं आधुनिक संसाधनों से सशक्त बनाया जाए।
  3. प्रत्येक जिले में छात्राओं की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के लिए महिला परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएँ।
  4. मेट्रो एवं इलेक्ट्रिक बसों में सभी विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत किराया रियायत प्रदान की जाए।
  5. NEET, SSC, पुलिस भर्ती सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं एवं पेपर लीक की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
  6. परीक्षा अनियमितताओं, प्रशासनिक लापरवाही, बेरोज़गारी एवं मानसिक तनाव से प्रभावित छात्रों को न्याय सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  7. राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करते हुए उसे पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष, जवाबदेह एवं विश्वसनीय बनाया जाए तथा शिक्षा संबंधी नीतिगत निर्णयों में राज्यों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

आराध्य बाजपेयी ने कहा कि एसएफ़आई शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और छात्र अधिकारों के प्रश्नों पर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में संघर्ष जारी रखेगी। यदि छात्रों की न्यायसंगत मांगों की लगातार उपेक्षा की गई, तो संगठन व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं समाज के सभी जागरूक नागरिकों से शिक्षा बचाने, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने तथा छात्र-युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।

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