KNEWS DESK – तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कैमक स्ट्रीट स्थित अपने ऑफिस के बिलबोर्ड को हटाए जाने के विवाद को लेकर बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है। TMCP के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें जितना परेशान करना है, कर लें, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
अभिषेक बनर्जी ने मंच से कहा, “मैं BJP से कहूंगा कि जितना टॉर्चर कर सकते हो, करो। जब तक मैं मरा नहीं, तब तक मैं हारा नहीं। लड़ाई होगी।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
बिलबोर्ड हटाने पहुंची थी KMC की टीम
दरअसल, गुरुवार दोपहर को अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट ऑफिस के बिलबोर्ड को हटाने को लेकर तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। KMC के कर्मचारी पुलिस के साथ बिलबोर्ड हटाने पहुंचे थे। नगर निगम की ओर से इसे कथित तौर पर गैर-कानूनी बताया गया था।
बिलबोर्ड हटाने के दौरान अभिषेक बनर्जी के ऑफिस के कर्मचारियों, पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों के बीच कथित तौर पर हाथापाई भी हुई। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिलबोर्ड हटाने का नोटिस वैध नहीं था, क्योंकि उस पर कोई स्टांप नहीं लगा था। हालांकि, शाम करीब 5:45 बजे बिलबोर्ड हटा दिया गया।
‘एक भी गद्दार को TMC में वापस नहीं आने देंगे’
TMCP के स्थापना दिवस पर आयोजित रैली में अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़कर दूसरी जगह जाने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ऐसे नेताओं को दोबारा पार्टी में जगह नहीं देगी।
उन्होंने कहा, “हम एक भी गद्दार को तृणमूल कांग्रेस में वापस नहीं आने देंगे।” अभिषेक ने छात्रों और युवाओं की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली के जमींदारों को युवाओं की ताकत के सामने झुकने पर मजबूर किया है।
अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने करीब 2.5 करोड़ महिलाओं को इस योजना के तहत सहायता दी है। साथ ही उन्होंने बीजेपी सरकार की अन्नपूर्णा योजना पर भी सवाल उठाए।
बिलबोर्ड विवाद में 13 गिरफ्तार
बिलबोर्ड विवाद को लेकर अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में कुल तीन केस दर्ज किए गए हैं और कई गैर-जमानती धाराएं भी लगाई गई हैं।
वहीं, नगर निगम और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्र पॉल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अदालत जाने का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि बिना वजह बिलबोर्ड हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
मामला अब अदालत में भी लंबित है। कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार फिलहाल नई अंतरिम सुरक्षा देने की गुंजाइश नहीं है और नगर पालिका को बिलबोर्ड की वैधता को लेकर मालिक को जानकारी देनी होगी।