Knews Desk- गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 दिनों की फ्री राइड सुविधा समाप्त हो गई है। अब 14 मई 2026 की आधी रात से इस एक्सप्रेसवे पर आधिकारिक रूप से टोल टैक्स वसूली शुरू हो गई है। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों को अब ‘जितनी दूरी, उतना टोल’ मॉडल के तहत भुगतान करना होगा। टोल कलेक्शन के लिए मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक और FASTag आधारित सिस्टम का उपयोग किया गया है। हाई-टेक कैमरे और सेंसर चलते हुए वाहनों को स्कैन कर उनकी एंट्री और एग्जिट रिकॉर्ड करेंगे। फिलहाल वाहन निकास (exit) पर भुगतान करेंगे, जबकि भविष्य में पूरी तरह टोल-फ्री फ्लो सिस्टम लागू करने की योजना है।
टोल दरों का विवरण

एक्सप्रेसवे पर वाहन श्रेणी के अनुसार टोल तय किया गया है:
- कार/जीप: लगभग 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर
मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा पर अनुमानित टोल 1500 से 1800 रुपये तक हो सकता है। - बस/ट्रक: लगभग 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर
पूरे मार्ग पर लगभग 5700 रुपये या उससे अधिक का टोल लग सकता है। - दोपहिया वाहन: प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है
प्रमुख रूट्स पर टोल का अनुमान (मेरठ से एंट्री पर)

टोल प्लाजा और नेटवर्क व्यवस्था
मेरठ से प्रयागराज के बीच कुल 12 टोल और रैंप प्लाजा बनाए गए हैं। पहले सेक्टर (मेरठ से बदायूं, लगभग 130 किमी) में 7 टोल और रैंप प्लाजा शामिल हैं। इन सभी प्वाइंट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालकों को केवल तय की गई दूरी का ही भुगतान करना पड़े।
निर्माण और संचालन व्यवस्था
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो प्रमुख कंपनियों द्वारा किया गया है। आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड ने मेरठ क्षेत्र से एक-तिहाई हिस्सा बनाया है, जबकि शेष दो-तिहाई हिस्से का निर्माण अडानी समूह द्वारा किया गया है। टोल संग्रह का सिस्टम सॉफ्टवेयर आधारित है, जो राशि को दोनों कंपनियों में उनके हिस्से के अनुसार स्वचालित रूप से विभाजित करता है।
यातायात और गति सीमा
Ganga Expressway पर प्रतिदिन लगभग 12 से 14 हजार वाहन गुजर रहे हैं। यहां वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। टोल वसूली शुरू होने के साथ अब यात्रियों को मुफ्त यात्रा का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन आधुनिक तकनीक और दूरी आधारित भुगतान प्रणाली से यात्रा अधिक व्यवस्थित और तेज होने की उम्मीद है।