KNEWS DESK- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह और उनके परिवार को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यह आदेश उनकी सुरक्षा वापस लिए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई की तारीख 12 मई तय की है। अदालत ने साफ कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, हरभजन सिंह ने हाल ही में कुछ अन्य नेताओं के साथ राजनीतिक बदलाव के बाद अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके बाद पंजाब पुलिस ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी, जिसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर CRPF सुरक्षा तैनात कर दी।
सुरक्षा हटाए जाने के बाद उनके घर के बाहर प्रदर्शन हुए और दीवारों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी लिखी गईं। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर याचिका दायर की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा हटाने का निर्णय बिना किसी खतरे के पुनर्मूल्यांकन और बिना उचित प्रक्रिया के लिया गया। इसमें यह भी कहा गया कि सुरक्षा हटने के बाद भीड़ ने उनके आवास पर प्रदर्शन किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
याचिका में यह भी दावा किया गया कि घटना के समय हरभजन सिंह शहर से बाहर थे और उन्हें अपने परिजनों से स्थिति की जानकारी मिली।
हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या नागरिक की सुरक्षा राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की ढिलाई गंभीर परिणाम दे सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और 12 मई की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस घटना ने राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।