KNEWS DESK- वाराणसी के सिंधोरा थाना क्षेत्र के ग्राम बुंची निवासी कौशिक कुमार मिश्रा की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं। उनकी हालत को देखते हुए परिवार के सामने किडनी ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का प्रमुख विकल्प था। ऐसे कठिन समय में उनकी बहन अनीता मिश्रा ने आगे बढ़कर भाई को अपनी किडनी देने का फैसला किया।
परिवार के लिए यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन अनीता ने भाई की जिंदगी को प्राथमिकता देते हुए अंगदान की सहमति दी। इसके बाद मार्च 2026 में लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआइ में कौशिक का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। ट्रांसप्लांट के बाद कौशिक अब स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
अनीता मिश्रा ने बताया कि भाई को बीमारी की स्थिति में देखकर वह बेहद परेशान थीं। उनके मन में लगातार यही विचार था कि यदि उनकी किडनी भाई की जिंदगी बचाने में मदद कर सकती है, तो इससे बड़ा उनके लिए कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भाई के लिए कुछ करने का अवसर मिलने पर उन्होंने अपना फर्ज निभाया और अब उसे स्वस्थ होते देखकर उन्हें सबसे ज्यादा खुशी मिल रही है।
इसी तरह गाजीपुर की रहने वाली ज्ञानती ने भी अपने छोटे भाई अरविंद कुमार की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी दान करने का फैसला किया। अरविंद की बीमारी का पता चलने के बाद परिवार के सामने ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त डोनर की तलाश सबसे बड़ी चुनौती थी। परिवार चिंता में था कि आखिर भाई को नई जिंदगी देने के लिए कौन आगे आएगा।
इस मुश्किल घड़ी में बड़ी बहन ज्ञानती ने बिना पीछे हटे अंगदान का फैसला किया। उन्होंने अपने छोटे भाई के लिए किडनी दान करने की सहमति दी। इसके बाद अक्टूबर 2025 में संजय गांधी पीजीआइ, लखनऊ में अरविंद का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।
दोनों मामलों में बहनों का यह फैसला परिवार के लिए उम्मीद और भावनात्मक सहारे का कारण बना। इन घटनाओं ने यह भी दिखाया कि अंगदान का फैसला किसी मरीज और उसके परिवार के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है। बहनों ने अपने भाइयों के प्रति जिम्मेदारी और रिश्ते की मजबूती का उदाहरण पेश करते हुए उनके स्वस्थ भविष्य की राह आसान की।