KNEWS DESK- ग्वालियर समेत देशभर में कार्नियल ब्लाइंडनेस से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए आंखों की रोशनी लौटाने की राह में सबसे बड़ी चुनौती कार्निया की उपलब्धता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में 12 लाख से अधिक लोग ऐसी समस्या से प्रभावित हैं, जिन्हें दृष्टि वापस पाने के लिए कार्निया प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, नेत्रदान से लेकर कार्निया संग्रह और ट्रांसप्लांट तक की पूरी व्यवस्था जरूरत की तुलना में काफी पीछे है।
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार भारत में हर साल करीब 1.5 से 2 लाख कार्निया की जरूरत होती है। इसके मुकाबले वर्ष 2024-25 में देशभर में केवल 69,848 कार्निया ही संग्रहित किए जा सके। आंकड़ों से साफ है कि उपलब्धता और अनुमानित जरूरत के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
पिछले कुछ वर्षों में कार्निया संग्रह की संख्या में बढ़ोतरी जरूर हुई है। वर्ष 2022-23 में देश में 62,370 कार्निया संग्रहित किए गए थे। यह संख्या 2023-24 में बढ़कर 66,434 और 2024-25 में 69,848 हो गई। इसके बावजूद यह आंकड़ा विशेषज्ञों द्वारा बताई जा रही सालाना जरूरत के मुकाबले काफी कम है।
पांच साल में 1.37 लाख ट्रांसप्लांट
वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच पांच वर्षों में देशभर में कुल 1,37,761 कार्निया प्रत्यारोपण हुए। हालांकि, जरूरतमंद मरीजों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में जानकारी दी थी कि कार्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों की केंद्रीय स्तर पर कोई आधिकारिक वेटिंग लिस्ट मेंटेन नहीं की जाती। ऐसे में देश में वास्तव में कितने मरीज प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं, इसका सटीक राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
ग्वालियर में भी बड़ी कमी
ग्वालियर की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। जिले में हर साल करीब 500 कार्निया की जरूरत बताई जा रही है, लेकिन नेत्रदान के जरिए केवल 5 से 10 कार्निया ही उपलब्ध हो पाते हैं। यानी जरूरत के मुकाबले उपलब्धता बेहद कम है।
देश में फिलहाल 396 सक्रिय आई बैंक हैं, लेकिन केवल आई बैंक की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने, समय पर कार्निया संग्रह करने और उसे जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए बेहतर व्यवस्था की भी जरूरत है।
हर कार्निया ट्रांसप्लांट के योग्य नहीं
कार्निया संग्रह होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर स्थिति में प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मेडिकल जांच के दौरान संक्रमण, एंडोथीलियल सेल काउंट कम होने, अन्य चिकित्सकीय कारणों, संरक्षण या परिवहन में समस्या और समय पर उपयोग नहीं होने के कारण कुछ कार्निया अनुपयुक्त पाए जाते हैं।
इसलिए कार्निया से जुड़े आंकड़ों को तीन अलग-अलग स्तरों पर समझना जरूरी है—कितने कार्निया संग्रहित हुए, उनमें से कितने प्रत्यारोपण योग्य पाए गए और वास्तव में कितने ट्रांसप्लांट किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित लोगों को दृष्टि लौटाने के लिए नेत्रदान को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। साथ ही कार्निया संग्रह, संरक्षण, परिवहन और प्रत्यारोपण की पूरी व्यवस्था को मजबूत किए बिना मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर कम करना मुश्किल होगा।