राम मंदिर दान मामला: एसआईटी ने शासन को सौंपी 150 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट, एफआईआर दर्ज करने और 5 साल के ऑडिट की सिफारिश

डिजिटल डेस्क- अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने आज, 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। लखनऊ मंडल के आयुक्त और SIT अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने टीम के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर यह रिपोर्ट यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी। हालांकि, SIT अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यह एक शुरुआती रिपोर्ट है और इसके नतीजे फिलहाल गोपनीय रखे गए हैं।

ट्रस्ट के पुनर्गठन और सरकारी CEO की नियुक्ति का सुझाव

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह प्रारंभिक रिपोर्ट लगभग 150 पन्नों की है, जिसमें पिछले कुछ दिनों में करीब 150 प्रमुख व्यक्तियों से की गई गहन पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल का पूरा विवरण शामिल है। सूत्रों का दावा है कि SIT ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने और राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मजबूत सिफारिश की है। इसके अलावा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को नियुक्त करने और भविष्य की अनियमितताओं को रोकने के लिए नए कर्मचारियों की भर्ती व प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

पिछले 5 वर्षों के दान का होगा ऑडिट, सीएम योगी लेंगे अंतिम फैसला

SIT ने अपनी रिपोर्ट में एक बड़ा सुझाव यह भी दिया है कि पिछले पांच वर्षों में मंदिर को प्राप्त हुए सभी छोटे-बड़े दानों का विस्तृत ऑडिट कराया जाना चाहिए। चूंकि यह अभी अंतिम रिपोर्ट नहीं है, इसलिए जांच दल ने विस्तृत छानबीन के लिए सरकार से अतिरिक्त समय की भी मांग की है। विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच इस रिपोर्ट की सिफारिशों पर अब अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेंगे। इस शुरुआती रिपोर्ट के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और कुछ रसूखदार नाम भी सामने आ सकते हैं।

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