KNEWS DESK – राम मंदिर में दानपात्र और चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद अयोध्या में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विवादों और जांच प्रक्रिया के बीच ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की संरचना और भूमिका को लेकर पुनर्विचार शुरू हो गया है।
जानकारी के अनुसार, कुछ संतों और हिंदू संगठनों ने ट्रस्ट में अधिक पारदर्शिता और मजबूत निगरानी व्यवस्था की मांग उठाई है। इसी बीच यह भी चर्चा तेज हो गई है कि मंदिर प्रबंधन के लिए वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर एक नई व्यवस्था लागू की जा सकती है, जिसमें प्रशासनिक नियंत्रण और वित्तीय निगरानी और अधिक सख्त होगी।
यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो राम मंदिर का प्रबंधन किसी बोर्ड या सरकारी निगरानी वाली व्यवस्था के तहत लाया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब हाल ही में चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों को लेकर आरोप सामने आए, जिसके बाद SIT जांच और FIR तक दर्ज की गई। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इसके बाद ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे।
इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए अब ट्रस्ट के भविष्य और उसकी संरचना को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।
गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इसकी घोषणा की थी। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 12 सदस्य सरकार द्वारा नामित हैं।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास रहे हैं, जबकि महासचिव चंपत राय को दैनिक प्रशासन और प्रमुख निर्णयों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के अहम निर्णयों में भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में यदि कोई बड़ा प्रशासनिक बदलाव होता है, तो इसका असर मंदिर प्रबंधन की मौजूदा संरचना पर भी पड़ सकता है।