दिल्ली के 75 स्कूलों में फिर शुरू होगी रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना

KNEWS DESK- दिल्ली सरकार ने राजधानी के 75 सीएमश्री स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को दोबारा सक्रिय करने का बड़ा फैसला लिया है। इस पहल के जरिए हर साल करीब 50 करोड़ लीटर वर्षा जल संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि छात्रों और समाज में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के समक्ष बृहस्पतिवार को इस परियोजना की विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें स्कूल परिसरों में पहले से मौजूद रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति और उनमें मौजूद कमियों की जानकारी साझा की गई। जांच में पाया गया कि अधिकांश स्कूलों में सिस्टम तो बने हुए हैं, लेकिन लंबे समय से बंद पड़े हैं या उनकी नियमित देखरेख नहीं हुई।

कई स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के गड्ढों में कचरा, प्लास्टिक और गाद जमा मिली। कुछ स्कूल प्रशासन को तो यह तक जानकारी नहीं थी कि परिसर में ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्षा जल संरक्षण को मजबूत करने और पानी की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।उन्होंने बताया कि दिल्ली में औसतन 775 मिमी बारिश होती है और लगभग 2500 वर्ग फुट की छत से हर साल करीब दो लाख लीटर पानी संरक्षित किया जा सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए सरकार सरकारी स्कूलों में गैर सरकारी संगठन एहसास के मॉडल को अपनाने जा रही है, जिसे पहले ही दिल्ली जल बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है।

इस मॉडल के तहत स्कूलों की छतों से आने वाले बारिश के पानी को फिल्टर कर स्टोरेज टैंक और बोरवेल से जोड़ा जाएगा। इससे भूजल स्तर बढ़ाने के साथ-साथ सूख चुके बोरवेल को दोबारा चालू करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान को केवल तकनीकी परियोजना तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे जनजागरूकता अभियान के रूप में भी चलाया जाएगा। स्कूलों में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि पानी बचाने की आदत को समाज में मजबूत किया जा सके।तकनीकी टीमों ने 75 स्कूलों का ऑडिट पूरा कर लिया है। अब सुधार कार्य के तहत पाइपलाइन को सही चैनलों से जोड़ा जाएगा, गड्ढों की सफाई की जाएगी, नए फिल्टर लगाए जाएंगे और सिस्टम की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने प्रत्येक स्कूल के रखरखाव के लिए अलग बजट देने का भी निर्णय लिया है।