पंजाबः उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के 13 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, जमीन सौदों और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई कार्रवाई

डिजिटल डेस्क- पंजाब के उद्योग मंत्री और बड़े कारोबारी संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सौदों में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अरोड़ा और उनके करीबियों से जुड़े कुल 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। सूत्रों के मुताबिक, लुधियाना स्थित उनके आवास पर सुबह-सुबह ED की टीम पहुंची, जहां सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया। बताया जा रहा है कि अरोड़ा फिलहाल सरकारी काम के सिलसिले में विदेश यात्रा पर हैं, जिसके चलते वे इस कार्रवाई के दौरान मौजूद नहीं थे।

फाइंडोक फिनवेस्ट’ से जुड़े हेमंत सूद के ऑफिस और आवास पर भी छापेमारी

ED की जांच का दायरा केवल संजीव अरोड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कारोबारी सहयोगियों तक भी फैला हुआ है। इस दौरान लुधियाना में ‘फाइंडोक फिनवेस्ट’ से जुड़े हेमंत सूद और जालंधर के कथित बुकी चंद्रशेखर अग्रवाल के आवास और दफ्तरों की भी तलाशी ली गई। एजेंसी इन सभी के बीच वित्तीय लेनदेन और संभावित अवैध नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अरोड़ा की कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड पर कई गंभीर आरोप हैं। इनमें औद्योगिक जमीन के उपयोग में गड़बड़ी, शेयर बाजार में हेराफेरी, हवाला के जरिए धन का लेनदेन और दुबई से अवैध रूप से पैसा भारत लाने जैसे आरोप शामिल हैं। साथ ही, यह भी आरोप है कि अवैध सट्टेबाजी से जुड़े पैसों को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया।

महत्वपूर्ण दस्तावेजों को किया गया जब्त

ED की टीम फिलहाल दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। हालांकि, अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ED ने छापा मारा हो। इससे पहले साल 2024 में भी एजेंसी ने उनके और उनसे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस दौरान भी कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। जांच में यह आरोप सामने आया था कि कंपनियों ने औद्योगिक भूमि का उपयोग नियमों के विपरीत आवासीय परियोजनाओं के लिए किया, जिससे राज्य सरकार को भारी नुकसान हुआ।

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