जबलपुर में सड़क की बदहाली ने ली गर्भवती की परीक्षा, कीचड़ में हुई डिलीवरी के बाद ग्रामीणों ने खुद बनाई सड़क

Knews Desk- जबलपुर के दुर्गानगर गांव में सड़क की बदहाली ने एक गर्भवती महिला को ऐसी परेशानी में डाल दिया, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। गांव की रामकली बाई को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन बारिश के कारण रास्ता कीचड़ में तब्दील हो चुका था। एंबुलेंस और वाहन गांव तक नहीं पहुंच सके। आखिरकार रास्ते में ही रामकली की डिलीवरी हो गई।

इस घटना के बाद गांव के लोगों ने प्रशासन का इंतजार करने के बजाय खुद सड़क बनाने का फैसला किया है। महिलाएं, पुरुष और बच्चे मिलकर करीब 2 किलोमीटर लंबे रास्ते को चलने लायक बनाने में जुटे हैं।

दुर्गानगर गांव में बारिश के दिनों में आवागमन की समस्या बेहद गंभीर हो जाती है। गांव से बाहर निकलने वाला करीब 2 से ढाई किलोमीटर का रास्ता कीचड़ से भर जाता है। हाल ही में रामकली बाई को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उन्हें पैदल अस्पताल ले जाने लगे। रास्ता इतना खराब था कि एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच सकी।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही रामकली ने खुले आसमान के नीचे रास्ते में बच्चे को जन्म दे दिया। गनीमत रही कि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। रामकली के मुताबिक, रास्ते की खराब हालत के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। डिलीवरी के बाद वह करीब पांच दिन तक रिश्तेदार के घर रुकीं।

35 साल से विस्थापन का दर्द झेल रहे ग्रामीण

दुर्गानगर गांव शहपुरा जनपद की चिरपोड़ी ग्राम पंचायत में आता है। यह गांव जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर है। यहां रहने वाले परिवार करीब 35 वर्ष पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपनी जमीन और घर छोड़कर आए थे।

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विस्थापन के बाद उन्हें बेहतर जीवन और जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन आज भी गांव के लोग सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। करीब 90 से ज्यादा परिवारों और लगभग 1,200 की आबादी वाले इस गांव को अब तक पूर्ण गांव का दर्जा नहीं मिला है।

रामकली बाई की डिलीवरी की घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर खुद मोर्चा संभाल लिया। गांव के 100 से ज्यादा महिलाएं, 50 पुरुष और 25 से अधिक बच्चे श्रमदान कर रहे हैं। लोग अपने स्तर पर मुरम और पत्थर जुटाकर रास्ते पर डाल रहे हैं, ताकि बारिश के दौरान आवागमन कुछ आसान हो सके।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। अब वे अपने संसाधनों से ही रास्ता सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

बारिश में स्कूल जाना भी मुश्किल

गांव में शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है। यहां पांचवीं कक्षा तक का प्राथमिक स्कूल है, लेकिन स्कूल का पुराना भवन जर्जर होने के कारण करीब पांच साल पहले उसे गिरा दिया गया था। फिलहाल एक छोटे से अतिरिक्त कक्ष में स्कूल चल रहा है। इसी कमरे में आंगनवाड़ी केंद्र भी संचालित होता है।

पांचवीं के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए चिरपोड़ी गांव जाना पड़ता है। बारिश में रास्ता कीचड़ से भर जाने के कारण बच्चे कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं पहुंच पाते। रास्ते में गिरने से उनकी किताबें और कपड़े खराब होने की शिकायत भी ग्रामीण करते हैं।

प्रसव से पहले छोड़ना पड़ता है गांव

दुर्गानगर में सड़क की समस्या का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को प्रसव की तारीख नजदीक आने से करीब 15 दिन पहले ही दूसरे गांव में रिश्तेदारों के यहां भेजना पड़ता है।

स्थानीय महिला सखीबाई ने बताया कि उनकी बहू को भी करेली ले जाते समय रास्ते में ही प्रसव हो गया था। रास्ता खराब होने के कारण उन्हें पैदल जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि गांव में सड़क की समस्या को लेकर सचिव और सरपंच से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क का असर सिर्फ स्वास्थ्य और शिक्षा पर नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। दूसरे गांवों के लोग दुर्गानगर में अपनी बेटियों का रिश्ता तय करने से कतराते हैं। सड़क की बदहाली के कारण लड़के और लड़कियों के विवाह में भी परेशानी आ रही है।

इसके अलावा, गांव में पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण करीब 100 रुपये देकर निजी बोर से पानी खरीदने को मजबूर हैं। क्षेत्र में पायली नल जल परियोजना शुरू हुई थी, जिसे वर्ष 2024 तक पूरा होना था, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर 2027 कर दी गई है।

पंचायत की बैठकों में उठ चुका है मुद्दा

जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम के मुताबिक, उन्होंने दुर्गानगर की सड़क का मुद्दा जिला पंचायत की बैठकों में तीन से चार बार उठाया है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत को लिखित प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

वहीं, प्राथमिक स्कूल के शिक्षक योगेश पारदी ने बताया कि खराब रास्ते के कारण उन्हें रोज स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। बारिश में कई बार उनकी गाड़ी कीचड़ में फंस जाती है और वह गिर भी चुके हैं। इसके बावजूद वह बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाने के लिए रोज स्कूल पहुंचते हैं।

बरगी विधायक नीरज सिंह ने कहा कि दुर्गानगर वन ग्राम है। इसलिए सड़क और अन्य विकास कार्यों के लिए वन विभाग की मद से ही काम कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वह वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करेंगे और सड़क को जल्द से जल्द चलने लायक बनाने का प्रयास करेंगे।

विधायक के मुताबिक, सड़क निर्माण पर करीब 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। विधायक निधि से राशि देने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने बताया कि विधायक विकास निधि सीमित है और विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में गांव होने के कारण सभी कार्यों को एक साथ कर पाना संभव नहीं है।

जिला पंचायत सीईओ ने दिया सड़क की जांच का भरोसा

जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने कहा कि दुर्गानगर में ग्रामीण करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क खुद बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि मामले को संज्ञान में लिया गया है और इसकी जांच कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नियमों के तहत आती है या नहीं। अगर ऐसा संभव नहीं हुआ तो सुगम संपर्कता या किसी अन्य मद से सड़क निर्माण कराने का प्रयास किया जाएगा।

दुर्गानगर के ग्रामीणों का सवाल साफ है—जब उन्होंने 35 साल पहले विकास के लिए अपनी जमीन दी थी, तो आज भी उन्हें सड़क के लिए खुद फावड़ा क्यों उठाना पड़ रहा है?

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