KNEWS DESK – मुंबई में शुक्रवार, 19 जून का दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम और गहमागहमी भरा रहने वाला है। शहर में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस को लेकर दो अलग-अलग गुटों के भव्य आयोजन होने जा रहे हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
एक ओर उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली Shiv Sena का स्थापना दिवस समारोह गोरेगांव स्थित NESCO Centre में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राज्यभर से बड़ी संख्या में पदाधिकारी, विधायक, सांसद और कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है। पार्टी की ओर से करीब 30 हजार लोगों के जुटने का दावा किया जा रहा है।
कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और बारिश की संभावना को देखते हुए आयोजन को एयर कंडीशंड इंडोर हॉल में शिफ्ट किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके में कड़े पुलिस बंदोबस्त किए गए हैं और बड़े-बड़े होर्डिंग्स तथा कटआउट्स लगाए गए हैं।
छह बागी सांसदों पर टिकी निगाहें
इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण वे छह सांसद बताए जा रहे हैं, जिन्होंने हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर नया संसदीय समूह बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों के मंच से शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है, हालांकि इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि इन सांसदों को गोरेगांव के कार्यक्रम स्थल के पास एक होटल में ठहराया गया है, जिससे उनके संभावित शामिल होने को लेकर चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। यदि सभी कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं तो यह कदम राजनीतिक रूप से बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।
उद्धव ठाकरे गुट का शक्ति प्रदर्शन
दूसरी ओर, Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली Shiv Sena (यूबीटी गुट) का स्थापना दिवस समारोह सायन स्थित Shanmukhananda Hall में आयोजित किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे अपने संबोधन में बागी सांसदों के मुद्दे और पार्टी से कथित टूट पर तीखा राजनीतिक संदेश दे सकते हैं। माना जा रहा है कि वे कार्यकर्ताओं को यह संदेश देंगे कि भले ही नेता और जनप्रतिनिधि अलग हो जाएं, लेकिन शिवसैनिक और जनता का समर्थन अब भी उनके साथ है।
राजनीतिक महत्व बढ़ा
1966 में स्थापना के बाद से Shiv Sena कई बार विभाजन और आंतरिक संघर्षों का सामना कर चुकी है, लेकिन हर बार पार्टी ने नए राजनीतिक स्वरूप में खुद को पुनर्गठित किया है।
ऐसे में इस बार दोनों गुटों के अलग-अलग स्थापना दिवस समारोह महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन और जनसमर्थन के आकलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि किस गुट के कार्यक्रम में कितना जनसमर्थन दिखाई देता है और राजनीतिक संदेश कितना प्रभावी साबित होता है।