SIR पर ओवैसी का बड़ा बयान, ‘यह जिंदगी और मौत का सवाल’, कार्यकर्ताओं से की खास अपील

KNEWS DESK- तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसे लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया है और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से विशेष तैयारी करने की अपील की है।

हैदराबाद में AIMIM की एक बैठक को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि SIR को हल्के में लेना किसी भी स्थिति में सही नहीं होगा। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया पर पूरी नजर रखी जाए और हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई जाए।

बैठक में ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका उद्देश्य किसी को डराना नहीं है, लेकिन SIR प्रक्रिया को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचाने के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है।

ओवैसी ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा है, इसलिए इसे “जीवन-मरण का सवाल” मानकर काम करना होगा।

AIMIM प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को कहा कि पिछले कई हफ्तों से संगठन स्तर पर मतदाता सूची को लेकर काम चल रहा है और इसे और तेज करने की जरूरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने और जरूरी दस्तावेजों को सही कराने में मदद करने की अपील की।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, AIMIM पहले से ही SIR को लेकर एक जागरूकता अभियान चला रही है, जिसके तहत मतदाताओं को सूची में नाम जुड़वाने और सत्यापन प्रक्रिया में सहायता दी जा रही है।

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। कुछ दलों ने इस पर पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं, सत्तापक्ष पर भी विपक्षी दलों द्वारा मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं।

इस बीच ओवैसी की यह अपील राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है, जिसे आने वाले चुनावी समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

मतदाता सूची में नाम दर्ज होना किसी भी नागरिक के मतदान अधिकार का आधार होता है। ऐसे में SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता यह दर्शाती है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गरम हो सकता है। फिलहाल सभी राजनीतिक दल इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं और अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार कर रहे हैं।

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