हर 7 दिन में एक पायलट फेल, अब साल में एक बार होगा डोप टेस्ट? DGCA बदल सकता है नियम

Knews Desk: विमान यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलटों के डोप टेस्ट से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी चल रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA मौजूदा 10 फीसदी रैंडम टेस्टिंग व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। प्रस्ताव है कि हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट अनिवार्य किया जाए। हालांकि, टेस्ट कब होगा इसकी जानकारी पहले से नहीं दी जाएगी।

मौजूदा व्यवस्था में एयरलाइंस को अपने पायलटों में से 10 फीसदी का हर साल रैंडम डोप टेस्ट कराना होता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि हर पायलट की सालाना जांच हो। कुछ पायलट लगातार टेस्ट के लिए चुने जा सकते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक जांच से बाहर रह सकते हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर इस संभावित गैप को खत्म किया जा सकेगा।

सरकार की ओर से संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2018 के बीच 181 पायलट ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे। साल 2015 में 43, 2016 में 44, 2017 में 45 और नवंबर 2018 तक 49 पायलट पॉजिटिव मिले थे।

इसके अलावा सरकार ने बताया था कि जनवरी 2020 से जून 2022 के बीच कुल 210 पायलट और क्रू मेंबर्स को नियमों के तहत सस्पेंड किया गया था। इस अवधि में किसी पायलट का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया।

100 फीसदी टेस्टिंग से बढ़ेगी सुरक्षा, लेकिन चुनौती भी

हर पायलट का साल में कम से कम एक बार डोप टेस्ट कराने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो सकती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि कोई भी पायलट लंबे समय तक जांच के दायरे से बाहर न रहे। हालांकि, सरकार को इस व्यवस्था के कारण एयरलाइंस के संचालन, स्टाफिंग और समय पर उड़ानों पर पड़ने वाले असर का भी आकलन करना होगा।

पायलटों की डोप टेस्टिंग को लेकर चर्चा एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI-2379 में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद और तेज हुई। इस घटना में विमान की ऊंचाई अचानक कम होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पायलट के डोप टेस्ट से जुड़े सैंपल को पुष्टि के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई।

हालांकि, इस घटना में डोप टेस्ट का अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा। घटना के बाद एयर इंडिया ने भी अपने सभी पायलटों की एक बार डोप टेस्टिंग कराने की प्रक्रिया शुरू की थी।

अब सरकार और DGCA यह तय करने पर विचार कर रहे हैं कि मौजूदा 10 फीसदी रैंडम टेस्टिंग को जारी रखा जाए या हर पायलट की सालाना अनिवार्य जांच की व्यवस्था लागू की जाए। नई नीति का मुख्य उद्देश्य विमानन सुरक्षा को मजबूत करना और पायलटों की फिटनेस को लेकर किसी भी संभावित जोखिम को कम करना है।

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