‘चंपत राय से बड़ा भ्रष्ट कोई नहीं’… दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप, 12 करोड़ लोगों के चंदे पर उठाए सवाल

KNEWS DESK – अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि जांच एजेंसियां पहले से ही मामले की पड़ताल में जुटी हुई हैं।

इसी बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को उज्जैन दौरे के दौरान इस मामले को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। महाकाल मंदिर के दर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कड़ी टिप्पणी की।

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि देश में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है, जहां एक बड़े धार्मिक स्थल पर दान राशि को लेकर घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी तीखा हमला करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार से जोड़कर निशाना साधा।

कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं से चंदा लिया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कई दानदाताओं को रसीद और पारदर्शिता से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये संगठन कथित रूप से इस मामले में शामिल लोगों को बचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे “गवर्नेंस मॉडल” पर सवाल बताते हुए जांच की मांग को दोहराया।

इस विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया और सरकार ने जांच के आदेश दिए। 13 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SIT का गठन किया गया।

SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी, जिसके बाद 25 जून को FIR दर्ज हुई और 26 जून को अयोध्या पुलिस ने कई आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की। इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया है।

फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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