डिजिटल डेस्क- देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी पेपर लीक मामले में तफ्तीश कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी जांच को पूरी तरह से मुकम्मल कर लिया है। इस मामले में अब किसी भी नई या बड़ी गिरफ्तारी होने की उम्मीद बेहद कम जताई जा रही है। सीबीआई ने कोर्ट में पेश करने के लिए चार्जशीट का फाइनल ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे वर्तमान में जांच एजेंसी की लीगल टीम और अन्य कानून विशेषज्ञ बारीकी से परख रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत के सामने सबूतों के अभाव या किसी अन्य मोर्चे पर कोई तकनीकी कमी न रह जाए। सूत्रों के मुताबिक, यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो अगले 10 दिनों के भीतर सीबीआई इस पूरे मामले में अदालत के समक्ष अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने इस पूरे घटनाक्रम में अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें इस पेपर लीक नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार मानकर चार्जशीट में नामजद किया जा रहा है। हालांकि, कयासों के विपरीत इस बार की जांच में अब तक किसी बड़े हाई-प्रोफाइल चेहरे या रसूखदार नाम का खुलासा नहीं हुआ है। तफ्तीश के दौरान सीबीआई ने देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक संदिग्धों और संबंधित लोगों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की है। जांच अधिकारियों का मानना है कि साल 2024 में हुए पिछले नीट पेपर लीक के मुकाबले इस बार का पेपर लीक कहीं ज्यादा गंभीर और सुनियोजित था, जिसे रैकेट के बीच वाले बिचौलियों और कड़ियों ने मिलकर अंजाम दिया था।
क्रिमिनल्स का नया डार्क वेब बना ‘टेलीग्राम’, इसलिए सरकार लगा रही है रोक
सीबीआई की इस हाई-लेवल जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पेपर लीक करने वाले गिरोह और क्रिमिनल एक्टिविटी में शामिल लोग अब ‘टेलीग्राम’ ऐप का इस्तेमाल एक नए और सुरक्षित डार्क वेब के तौर पर कर रहे हैं। यही वजह है कि आगामी नीट-यूजी परीक्षाओं की सुरक्षा को देखते हुए सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा टेलीग्राम पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मुकाबले टेलीग्राम के एन्क्रिप्शन और चैनल सिस्टम के कारण अपराधियों को ट्रैक करना जांच एजेंसियों के लिए काफी पेचीदा और मुश्किल साबित होता है। सीबीआई की जांच में जो भी प्रशासनिक और तकनीकी कमियां उजागर हुई हैं, आने वाले समय में उन लूपहोल्स को बंद कर एनटीए की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से लीक-प्रूफ बनाने पर काम किया जाएगा।
प्रोफेसर्स से लेकर डॉक्टर्स तक गिरफ्तार, डिजिटल सबूतों से शिकंजा कसेगी CBI
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने बीते 12 मई को शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की थी और केस की कमान अपने सबसे तेजतर्रार अफसरों की टीम को सौंपी थी। जांच के दौरान सीबीआई ने देशव्यापी छापेमारी करते हुए दिल्ली, लातूर, जयपुर, गुरुग्राम, पुणे और नासिक जैसे बड़े शहरों से आरोपियों को दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में नामी कोचिंग सेंटर्स के संचालक, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के जाने-माने प्रोफेसर्स, स्कूल शिक्षक और पेशेवर डॉक्टर्स तक शामिल पाए गए, जो इस रैकेट को तकनीकी मजबूती दे रहे थे। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए सीबीआई की टीम ने आरोपियों के ठिकानों से उनके व्यक्तिगत मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और सैकड़ों अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनकी फोरेंसिक लैब में गहन जांच कराई जा चुकी है। जांच एजेंसी के पास इस बार आरोपियों के खिलाफ न सिर्फ मैन्युअल और मौखिक गवाह मौजूद हैं, बल्कि भारी मात्रा में अकाट्य डिजिटल सबूत भी हाथ लगे हैं। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट्स को सीबीआई अदालत में मुख्य हथियार के रूप में पेश करने जा रही है, ताकि पेपर लीक माफियाओं पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कसा जा सके।