उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, सावन माह की शुरुआत के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में आज से कावड़ यात्रा शुरू हो गई है. साल भर के इंतजार के बाद उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से शिवभक्त गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचने लगे हैं. पिछले साल 2025 में करीब साढ़े चार करोड़ शिवभक्तों ने हरिद्वार में गंगा में डुबकी लगाकर कावड़ यात्रा का अलग रिकॉर्ड बनाया था. वही इस बार की यात्रा आज 30 जुलाई से शुरू हुई है और अनुमान है कि भक्तों की संख्या और बढ़ने वाली है और आज सावन के पहले दिन से शुरू होकर सावन शिवरात्रि पर अंतिम जलाभिषेक के साथ अपने चरम पर कावड़ यात्रा पहुंचेगी. राज्य सरकार का दावा है कि यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, और श्रद्धालुओं को असुविधा न हो इसके लिए सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए हैं. सरकार ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मेले को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए और यही नहीं बल्कि भीड़ नियंत्रण, निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए एआई जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है. हर वर्ष चलने वाला यह कावड़ मेला आस्था का विषय होने के साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन जाता है. उसी प्रकार इस बार भी जहाँ सरकार तैयारियों पर दावे करती नज़र आ रही है, वही विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है. विपक्ष का मानना है कि सरकार केवल दावे करती रहती है, लेकिन जैसे-जैसे यात्रा चरम पर पहुंचेगी, इंतजामों की हकीकत सामने आ जाएगी. जिसके चलते आपसी बयानबाज़ी का दौर भी देखने को मिलने लगा है.
सावन की पहली बूंद के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है और कावड़ यात्रा व मेले की शुरुआत हो गई है. उत्तराखंड सहित देशभर से लाखों शिवभक्त गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. पिछले साल कावड़ मेले के दौरान साढ़े चार करोड़ से ज्यादा कावड़ियों ने रिकॉर्ड बनाया था. इस बार 30 जुलाई से शुरू हुई यात्रा में उससे भी ज्यादा भीड़ की उम्मीद है. जिसके चलते सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं को पुख्ता करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये गये है,और सभी तैयारियां पूरी होने का दावा भी किया जा रहा है. लेकिन दूसरी ओर आस्था के इस मेले पर सियासत भी शुरू हो गई है. विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है. जिसके चलते विपक्ष का कहना है, की सरकार हर विषय पर दावे करती है लेकिन दावे कागजों तक तो ठीक रहते है लेकिन कावड़ यात्रा के पीक पर होने पर सभी दावों की पोल खुल जाती है. जिसपर सत्ता पक्ष भी प्रतिकिर्या देता नज़र आ रहा है.
देवभूमि उत्तराखंड में सावन की शुरुआत के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है और आस्था का यह सैलाब अब हर दिन बढ़ता दिखने वाला है. पिछले साल साढ़े चार करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड बनाया था वही इस बार आंकड़े को पार करने की उम्मीद है. राज्य सरकार ने सुरक्षा, यातायात और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पुख्ता इंतजामों का दावा किया है. सरकार का कहना है कि मेले को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता है. वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है, विपक्ष का आरोप है कि अभी सब कागजों पर ठीक है, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ेगी, जमीन पर इंतजामों की असल हकीकत सामने आ जाएगी. विपक्ष का सवाल भी जायज है कि क्या ये इंतजाम कागजों तक ही सीमित रहेंगे या जमीन पर भी दिखेंगे. आखिर में फैसला श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा से होगा. अगर यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रही तो ये आस्था की मिसाल बनेगी और अगर अव्यवस्था हुई तो सवाल सरकार से ही पूछे जाएंगे. फिलहाल सबकी नजरें कावड़ मेले की तैयारियों पर डटी है, देखने वाली बात यह होगी कि कौन कितने सही रहने वाले है, सरकार के दावे या विपक्ष के सवाल।