NEET री-एग्जाम विवाद: नागपुर के छात्र को मिला ‘अबू धाबी’ का परीक्षा केंद्र, एन वक्त पर NTA की बड़ी चूक

डिजिटल डेस्क- नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा से ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र के नागपुर से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नागपुर के एक छात्र ने परीक्षा केंद्र के लिए अपनी पहली पसंद (फर्स्ट चॉइस) नागपुर को ही चुना था, लेकिन जब उसने री-एग्जाम के लिए अपना नया एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो उसमें परीक्षा केंद्र भारत में नहीं बल्कि सीधे संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में दिखा दिया गया। यह परीक्षा रविवार को आयोजित होनी है। इतनी कम अवधि और बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक विदेश जाकर परीक्षा देना छात्र और उसके मध्यमवर्गीय परिवार के लिए व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है, जिसने परीक्षा प्रबंधन की विश्वसनीयता को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। दरअसल, इस परीक्षार्थी को मूल परीक्षा के दौरान नागपुर के ही सरस्वती विद्यालय में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया था, जहाँ उसने सुचारू रूप से परीक्षा दी थी। मगर, पेपर लीक विवाद के बाद जब कुछ प्रभावित छात्रों के लिए पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई और नया एडमिट कार्ड जारी हुआ, तब एनटीए ने उसका सेंटर बदलकर ‘अबू धाबी इंडियन स्कूल’ कर दिया। छात्र के परिजनों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते समय उन्होंने पहली पसंद नागपुर, दूसरी वर्धा और तीसरी भंडारा चुनी थी। इन तीन विकल्पों के बावजूद अचानक सात संमदर पार का परीक्षा केंद्र आवंटित होना समझ से परे है। एडमिट कार्ड पर विदेश का पता देखते ही पूरा परिवार गहरे सदमे और असमंजस में आ गया।

पासपोर्ट तक नहीं है पास, पिता ने हेल्पलाइन पर दर्ज कराई शिकायत

छात्र के पिता मोहम्मद तालिब ने अपनी बेबसी और नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनका परिवार अपने बेटे को सिर्फ एक परीक्षा दिलाने के लिए इतनी दूर विदेश भेजने में आर्थिक और व्यावहारिक रूप से सक्षम नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि छात्र के पास अभी तक पासपोर्ट भी नहीं है, ऐसे में परीक्षा से महज 24 घंटे पहले अंतरराष्ट्रीय यात्रा की कोई भी तैयारी करना मुमकिन नहीं है। इस बड़ी गड़बड़ी के सामने आते ही परिवार ने तुरंत एनटीए की आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क कर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। परिजनों के मुताबिक, हेल्पलाइन अधिकारियों ने शुरुआती तौर पर इस तकनीकी खामी को अपनी गलती माना है और आंतरिक जांच के बाद जल्द से जल्द एक संशोधित (करेक्टेड) एडमिट कार्ड जारी करने का भरोसा दिया है। हालांकि, परीक्षा के ऐन वक्त पर पैदा हुई इस मानसिक प्रताड़ना ने छात्र की चिंता और तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

पूर्व शिक्षा मंत्री ने बताया गंभीर चूक, व्यवस्थाओं पर खड़े हुए सवाल

इस संवेदनशील मामले के तूल पकड़ते ही राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। महाराष्ट्र के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. अनीस अहमद ने इस घटना को एक अक्षम्य और गंभीर प्रशासनिक चूक करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा एजेंसी को बिना किसी देरी के त्वरित एक्शन लेते हुए छात्र को नागपुर या उसके किसी नजदीकी शहर में ही परीक्षा केंद्र अलॉट करना चाहिए ताकि उसका पूरा साल बर्बाद न हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ एक छात्र की व्यक्तिगत परेशानी का नहीं है, बल्कि देश की इतनी बड़ी परीक्षा संचालित करने वाली नोडल एजेंसी की साख से जुड़ा हुआ है, जो पहले से ही कई बड़े विवादों के कारण चौतरफा जांच और आलोचनाओं का सामना कर रही है।

सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच 22.79 लाख से अधिक छात्र देंगे परीक्षा

दूसरी तरफ, एनटीए का दावा है कि इस बार नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा को पूरी तरह से निष्पक्ष, लीक-प्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए जमीन पर व्यापक और अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। परीक्षा सामग्री और प्रश्नपत्रों को जीपीएस युक्त आधुनिक वाहनों के जरिए सीधे पुलिस सुरक्षा के घेरे में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। देश के सभी प्रमुख और संवेदनशील केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम इंस्टॉल किए गए हैं। इस बार परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से दो लाख से ज्यादा सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

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