मुरादाबादः गलत एडमिट कार्ड से बिगड़ा खेल, MJPRU की गलती से परीक्षा केंद्र ढूंढने के लिए भटके छात्र, एग्जाम छूटा

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने दर्जनों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएससी फाइनल ईयर के 12 से अधिक छात्र सिर्फ एडमिट कार्ड में हुई गलती के कारण अपनी मुख्य परीक्षा देने से वंचित रह गए। इस घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया। मामला गुरुवार सुबह 8 बजे की पाली में होने वाली परीक्षा का है। छात्र तय समय पर अपने एडमिट कार्ड में दर्ज परीक्षा केंद्र दयानंद डिग्री कॉलेज पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें बड़ा झटका लगा। कॉलेज बंद मिला और वहां परीक्षा आयोजित ही नहीं हो रही थी। इससे छात्रों में अफरा-तफरी मच गई और वे तुरंत दूसरे संभावित केंद्र की ओर भागे।

हिंदू कॉलेज ने परीक्षा दिलाने से किया मना

इसके बाद सभी छात्र हिंदू कॉलेज मुरादाबाद पहुंचे, जहां उस दिन परीक्षा आयोजित की जा रही थी। लेकिन यहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कॉलेज प्रशासन ने साफ कर दिया कि विश्वविद्यालय द्वारा भेजी गई आधिकारिक सूची में इन छात्रों के नाम शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन और फ्लाइंग स्क्वाड से काफी अनुरोध किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें प्रवेश से मना कर दिया गया। नतीजतन, समय पर केंद्र पर पहुंचने के बावजूद ये छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए। इस स्थिति ने छात्रों के बीच गहरा रोष पैदा कर दिया।

गुस्साए छात्रों ने किया प्रदर्शन

गुस्साए छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि यह पूरी तरह से विश्वविद्यालय की लापरवाही है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। छात्रों ने मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए, ताकि उनका एक साल बर्बाद होने से बच सके। वहीं, हिंदू कॉलेज के परीक्षा प्रभारी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने केवल विश्वविद्यालय से प्राप्त सूची के आधार पर ही छात्रों को अनुमति दी। जिन छात्रों के एडमिट कार्ड पर दयानंद डिग्री कॉलेज का नाम था और जिनका रिकॉर्ड आधिकारिक सूची में नहीं था, उन्हें परीक्षा में बैठने देना संभव नहीं था। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दे दी गई है। जानकारी के मुताबिक, प्रभावित छात्रों में से अधिकांश पुराने बैच (प्री-एनईपी) से संबंधित हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी जटिल हो गई है। अब उनके सामने यह चिंता है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो उनका पूरा एक साल बर्बाद हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *