KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार सुबह एक पटाखा गोदाम में भीषण विस्फोट हो गया. हादसा थाना पिपरी और पूरामुफ्ती क्षेत्र की सीमा के पास, कौशांबी-प्रयागराज बॉर्डर पर स्थित बताए जा रहे ‘आदित्य’ नाम के पटाखा गोदाम में हुआ. बताया जा रहा है कि सुबह करीब 11 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
कई मकान मलबे में तब्दील
विस्फोट इतना तेज था कि आसपास स्थित कई मकान इसकी चपेट में आ गए. कई घरों के क्षतिग्रस्त होने के साथ कुछ के पूरी तरह ध्वस्त होने की सूचना है. धमाके की आवाज करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात सामने आई है. घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए. मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया. स्थानीय लोग भी मलबा हटाने में प्रशासन की मदद कर रहे हैं.
मौके पर अभी भी हो रहे पटाखे के धमाके
विस्फोट के बाद घटनास्थल पर कुछ पटाखों के फटने की आवाजें आने की भी जानकारी सामने आई है. इसके चलते राहत-बचाव टीमों को काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया. कौशांबी के डीएम और एसपी समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं. कई थानों की पुलिस फोर्स को भी घटनास्थल पर तैनात किया गया है.
7 लोगों की मौत की सूचना
हादसे में 7 लोगों की मौत की सूचना सामने आई है, जबकि दर्जनभर से अधिक लोगों के झुलसने और मलबे में दबने की बात कही जा रही है. हालांकि, प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों को इलाज उपलब्ध कराने की है.
भारी मात्रा में बारूद रखने पर सवाल
इस घटना के बाद पटाखा गोदाम में बारूद के भंडारण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, लाइसेंस के तहत सीमित मात्रा में ही बारूद रखने की अनुमति होती है. ऐसे में धमाके की भयावहता को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि गोदाम में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पटाखे या विस्फोटक सामग्री मौजूद हो सकती थी. अब जांच का मुख्य विषय यह होगा कि गोदाम में कितनी मात्रा में पटाखे और बारूद रखा गया था, उसे रखने की अनुमति थी या नहीं और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं.
फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की जांच में जुटे हैं. राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में हुए वास्तविक नुकसान और जनहानि की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी.