Knews Desk- महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर की गई एक टिप्पणी पर नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन सपकाल ने कथित तौर पर सुनेत्रा पवार के लिए ‘गूंगी गुड़िया’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसके बाद एनसीपी नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। एनसीपी ने इस टिप्पणी को महिला नेता का अपमान बताते हुए कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के राजनीतिक सफर की याद दिलाई है।
दरअसल, सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री होने के साथ बीड जिले की प्रभारी मंत्री भी हैं। एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने उनसे सवाल किया था, लेकिन उनकी जगह एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे ने जवाब दिया। इसी कार्यक्रम से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन सपकाल ने सुनेत्रा पवार पर टिप्पणी की और उन्हें ‘गूंगी गुड़िया’ कहा।
टिप्पणी सामने आते ही महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। एनसीपी नेताओं और विधायकों ने कांग्रेस को घेरते हुए इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक सोच बताया। इसके साथ ही पार्टी नेताओं ने कांग्रेस को इंदिरा गांधी का उदाहरण भी याद दिलाया।
इंदिरा गांधी को लेकर भी इस्तेमाल हुआ था यही शब्द
भारतीय राजनीति में ‘गूंगी गुड़िया’ शब्द नया नहीं है। साल 1966 में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए भी इस तरह की टिप्पणी की थी। इंदिरा गांधी 19 जनवरी 1966 को देश की प्रधानमंत्री बनी थीं। शुरुआती दौर में कई राजनीतिक विरोधियों ने उनके नेतृत्व को कमजोर समझा, लेकिन बाद में उन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ स्थापित की।
इंदिरा गांधी देश की सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हुईं। यही कारण है कि एनसीपी अब कांग्रेस नेता की टिप्पणी को उसी पुराने राजनीतिक प्रसंग से जोड़कर जवाब दे रही है।
महिला नेताओं को कम आंकने का पुराना इतिहास
भारतीय राजनीति में कई ऐसी महिला नेता रही हैं, जिन्हें शुरुआत में कमजोर या अनुभवहीन मानकर खारिज करने की कोशिश हुई, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई। उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी भी इसका उदाहरण हैं। अक्टूबर 1963 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने करीब चार वर्षों तक प्रदेश की कमान संभाली।
उनके कार्यकाल में प्रशासनिक सख्ती और विकास योजनाओं को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। राज्य कर्मचारियों की लंबी हड़ताल के दौरान भी उन्होंने अपना रुख नहीं बदला और एक मजबूत प्रशासक के रूप में पहचान बनाई।
जयललिता से मायावती तक कई बड़े उदाहरण
तमिलनाडु की राजनीति में जयललिता का सफर भी संघर्ष से भरा रहा। विधानसभा में अपमान का सामना करने के बाद उन्होंने सत्ता में वापसी का संकल्प लिया और आगे चलकर कई बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में मायावती ने भी चार बार मुख्यमंत्री पद संभाला और प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत जगह बनाई।
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भी शुरुआती दौर में राजनीतिक अनुभव की कमी को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने लंबे समय तक बिहार की सत्ता संभाली। दिल्ली में शीला दीक्षित लगातार तीन कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहीं और राजधानी में बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े बदलाव उनके कार्यकाल में हुए।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी भी भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व का बड़ा उदाहरण रही हैं। उन्होंने दशकों पुराने वाम मोर्चे के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती दी। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों के जरिए ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की और 2011 के विधानसभा चुनाव में 34 साल पुराने वाम शासन का अंत कर दिया।
सुनेत्रा पवार पर टिप्पणी से कांग्रेस की बढ़ीं मुश्किलें
अब सुनेत्रा पवार को लेकर ‘गूंगी गुड़िया’ वाली टिप्पणी ने महाराष्ट्र में कांग्रेस को राजनीतिक हमलों के घेरे में ला दिया है। एनसीपी इसे सिर्फ सुनेत्रा पवार पर टिप्पणी नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व को कमतर आंकने वाली मानसिकता से जोड़ रही है।
राजनीतिक इतिहास में इंदिरा गांधी, सुचेता कृपलानी, जयललिता, मायावती, शीला दीक्षित और ममता बनर्जी जैसी कई महिला नेताओं ने शुरुआती आलोचनाओं और विरोध के बावजूद अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। ऐसे में सुनेत्रा पवार पर की गई टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।