डिजिटल डेस्क- भारत सरकार ने देश की सुरक्षा और सैन्य मोर्चे पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए भारतीय सेना के अगले प्रमुख के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। वर्तमान में उप सेना प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) की जिम्मेदारी संभाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह मौजूदा थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे, जिनका दो वर्ष का सफल कार्यकाल इस महीने के अंत में यानी जून 2026 में पूरा होने जा रहा है। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 30 जून 2024 को सेना की कमान संभाली थी। नियमों के मुताबिक, आर्मी चीफ का कार्यकाल अधिकतम 3 साल या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक के लिए होता है।
रणनीतिक क्षेत्रों का अनुभव और सीमाओं पर लंबी सेवाएं
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना के सबसे अनुभवी, कुशल और रणनीतिक रूप से दूरदर्शी सैन्य अधिकारियों में गिना जाता है। वह दिसंबर 1986 में सेना की प्रतिष्ठित आर्मर्ड कोर में कमीशन हुए थे। लगभग चार दशकों के अपने लंबे और बेदाग सैन्य सफर में उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में अद्भुत योगदान दिया है। जनरल सेठ के पास थार के धधकते रेगिस्तानी इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर की दुर्गम पहाड़ियों और पश्चिमी मोर्चे की अत्यधिक संवेदनशील सीमाओं पर चुनौतीपूर्ण कमान संभालने का एक व्यापक अनुभव है।
दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा जनरल्स में शामिल
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के नाम कई ऐसी सैन्य उपलब्धियां दर्ज हैं, जो उन्हें इस सर्वोच्च पद के लिए सबसे योग्य बनाती हैं। उन्होंने भारतीय सेना की अत्यंत महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में देश को अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं। वह भारतीय सेना के उन चुनिंदा वरिष्ठतम सैन्य अधिकारियों में शुमार हैं, जिन्हें देश के पश्चिमी मोर्चे पर दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमानों का सफल नेतृत्व करने का गौरव हासिल है। इसके अलावा, वे अंगोला में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित शांति मिशन में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके साथ ही सेना मुख्यालय और सेना की सैन्य क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर रहकर उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं।
एनडीए और आईएमए के गौरवशाली छात्र, ट्रेनिंग में रहे हमेशा अव्वल
अकादमिक और सैन्य प्रशिक्षण के मामले में भी जनरल सेठ का रिकॉर्ड हमेशा सर्वोत्कृष्ट रहा है। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला, भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के बेहद मेधावी पूर्व छात्र रहे हैं। अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने ‘जूनियर कमांड कोर्स’ में पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया था। यही नहीं, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड अधिकारी’ के सर्वोच्च सम्मान से भी नवाजा गया था।
‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’ सहित कई उच्च सैन्य सम्मानों से सुशोभित
भारतीय सेना में उनके अद्वितीय और उत्कृष्ट योगदान, अदम्य साहस और बेमिसाल नेतृत्व क्षमता के लिए भारत सरकार उन्हें समय-समय पर देश के शीर्ष सैन्य सम्मानों से अलंकृत कर चुकी है। जनरल धीरज सेठ की विशिष्ट और सराहनीय राष्ट्रसेवा के लिए उन्हें ‘परम विशिष्ट सेवा मेडल’, ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ और ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सेना प्रमुख बनना भारतीय सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण को एक नई दिशा देगा।