KNEWS DESK- महाराष्ट्र दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की भाषा और सामाजिक सौहार्द को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर किसी भी तरह का विवाद या हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की पहचान हमेशा खुले और प्रगतिशील राज्य के रूप में रही है। यहां विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के लोग आकर बसे हैं, और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है, इसे कभी भी विभाजन का कारण नहीं बनना चाहिए।
फडणवीस ने यह भी कहा कि जो लोग अब तक मराठी नहीं सीख पाए हैं, उनके लिए सरकार और समाज मिलकर सहयोग करेंगे। उनका जोर इस बात पर रहा कि भाषा सीखना स्वाभाविक और सकारात्मक प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि दबाव या डर के कारण।
भाषा नीति पर सरकार का रुख
राज्य सरकार के हालिया फैसलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना और सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे भारत के विकास इंजन के रूप में देखा जाता है। ऐसे में राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भाषा का सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि मराठी भाषा का प्रचार-प्रसार जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर किसी भी तरह की कट्टरता या टकराव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।