KNEWS DESK- शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में जारी राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। संसदीय दल की बैठक से कई सांसदों की गैरमौजूदगी के बाद पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाते हुए बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित सांसदों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक में केवल लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, राजभाऊ वाजे और अनिल देसाई शामिल हुए। राज्यसभा सांसद संजय राउत भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक के बाद राउत ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है और उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
राउत ने बागी सांसदों के रुख को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि पार्टी के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि संबंधित सांसद अभी भी शिवसेना (UBT) के सदस्य हैं और पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर संसद पहुंचे हैं। ऐसे में पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने पर उन्हें कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। राउत ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की राजनीति को अस्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इधर, महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा भी तेज हो गई है। शिवसेना के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए शिवसेना का साथ चुना है। उन्होंने इन सांसदों का स्वागत करते हुए इसे पार्टी के लिए सकारात्मक घटनाक्रम बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है। अब सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व की अगली कार्रवाई और बागी सांसदों के जवाब पर टिकी हुई हैं।