KNEWS DESK- 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सशस्त्र बलों की उपलब्धियों और रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र किया। आकाशवाणी के जरिए देश के सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्ध के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के जरिए सेना का आधुनिकीकरण सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की वजह से देश के रक्षा क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आया है। भारत अब रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये
रक्षा मंत्री के मुताबिक, वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी करीब एक दशक में रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन में DPSU और सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी है, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24 फीसदी हो गई है। सरकार का जोर निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने पर भी है।
रक्षा निर्यात में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में जहां रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि आज भारत के रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं और देश में करीब 145 रक्षा निर्यातक सक्रिय हैं। सरकार ने वर्ष 2029 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा बजट बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये
रक्षा मंत्री ने बताया कि देश का रक्षा बजट भी पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है। 2013-14 में यह 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
वहीं रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत खर्च 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास यानी R&D का बजट भी 2014-15 के 15,283 करोड़ रुपये से बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया है।
8.75 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक साल में रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी DAC ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा प्रोजेक्ट्स को Acceptance of Necessity दी है। उन्होंने कहा कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई सुधार किए गए हैं और स्वदेशी खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है।
फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों की सीमा को दोगुना किया गया है। इसके अलावा 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को रेवेन्यू रूट के जरिए स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए आगे बढ़ाया गया है।
भविष्य के युद्ध के लिए अत्याधुनिक तकनीक
रक्षा मंत्री ने कहा कि DRDO और सशस्त्र बल भविष्य की युद्ध चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन सिस्टम के सफल परीक्षण का उल्लेख किया, जिसमें पारंपरिक हथियारों को प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता है।
इसके अलावा MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल, लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, रुद्र-MII एयर-टू-सरफेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-SR और पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के परीक्षणों को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
हाइपरसोनिक और एयर डिफेंस पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि एक्टिव कूल्ड फुल-स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 1,200 सेकेंड से अधिक समय तक सफल परीक्षण भारत की हाइपरसोनिक तकनीक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने स्वदेशी कुश लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल के सफल परीक्षण का भी जिक्र किया। इससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सीमा विकास और सैनिकों का कल्याण
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान देश और विदेश में राहत एवं बचाव अभियानों में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने उन्हें देश का फर्स्ट रिस्पॉन्डर बताया।
उन्होंने कहा कि जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का कल्याण भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पिछले पांच वर्षों में ECHS के बजट में 300 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। Armed Forces Flag Day Fund के तहत पेंशन सहायता 4 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपये, शिक्षा सहायता 1 हजार से बढ़ाकर 2 हजार रुपये और विवाह सहायता 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की गई है।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही महिला शक्ति
राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने NDA से प्रशिक्षण लेकर तीनों सेनाओं में अधिकारी के तौर पर कमीशन पाने वाली पहली महिला कैडेट्स को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। समुद्र प्रदक्षिणा जैसी पहली त्रि-सेवा महिला नौकायन यात्रा को उन्होंने नए भारत में नारी शक्ति की मिसाल बताया।
सैनिकों के साहस को किया सलाम
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा की जिम्मेदारी सशस्त्र बलों के कंधों पर है। कठिन परिस्थितियों में सैनिकों का साहस, अनुशासन और समर्पण देशवासियों को सुरक्षित वातावरण देता है। उन्होंने देश के सभी सैनिकों को उनकी सेवा, बलिदान और समर्पण के लिए नमन किया।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि 2026 का स्वतंत्रता दिवस वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के कारण विशेष है। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपना योगदान देने की अपील की।