खामेनेई की मौत के 4 महीने बाद अंतिम विदाई, ईरानी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को बुलाया तेहरान

डिजिटल डेस्क- ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के करीब चार महीने बाद अब उनके अंतिम संस्कार की तारीखें तय कर दी गई हैं। कूटनीतिक (डिप्लोमैटिक) सूत्रों के हवाले से बुधवार को यह बड़ी खबर सामने आई है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यह भव्य कार्यक्रम 5 से 9 जुलाई तक ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, पीएम मोदी इस यात्रा पर जाएंगे या नहीं, इसे लेकर अभी नई दिल्ली (भारत सरकार) की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि या कन्फर्मेशन नहीं आया है। गौरतलब है कि इससे पहले खामेनेई का अंतिम संस्कार मार्च महीने में होना तय हुआ था, लेकिन अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान की जंग लंबी खिंच जाने के कारण इस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा था।

अमेरिकी-इजराइली हवाई हमले में हुई थी 86 वर्षीय खामेनेई की मौत

86 वर्ष के अयातुल्ला अली खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को अपने परिसर पर हुए अमेरिका और इजराइल के एक भीषण संयुक्त हवाई हमले में मारे गए थे। ‘खलीज टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिस वक्त यह हमला हुआ, खामेनेई अपने आवास के भीतर रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख मोहम्मद पाकपूर और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे। उसी दौरान अमेरिकी और इजराइली फाइटर जेट्स ने उनके ठिकाने पर ताबड़तोड़ बमबारी की। हमला इतना जोरदार था कि खामेनेई की मौके पर ही मौत हो गई और उनका शव मलबे में तब्दील हो चुके परिसर से बरामद किया गया था। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक, इस सैन्य ऑपरेशन के बाद खामेनेई के क्षत-विक्षत शव की तस्वीरें पुष्टि के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी भेजी गई थीं।

रुहोल्लाह खुमैनी के बाद संभाली थी ईरान की कमान

अयातुल्ला अली खामेनेई का जाना ईरान के इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। साल 1989 में ईरान के पहले सुप्रीम लीडर और इस्लामिक क्रांति के प्रणेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद खामेनेई ने देश की कमान संभाली थी। जहां खुमैनी को पहलवी राजशाही को उखाड़ फेंकने वाली वैचारिक ताकत माना जाता था, वहीं खामेनेई ने पिछले तीन दशकों से अधिक समय में ईरान के सैन्य और अर्ध-सैन्य (पैरामिलिट्री) ढांचे को आधुनिक और बेहद आक्रामक रूप देने में मुख्य भूमिका निभाई थी। अब उनके अंतिम विदाई कार्यक्रम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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