कांग्रेस जीती, सरकार ने बदला नियम… गोकुल डेयरी के चुनाव पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान

knews desk – पश्चिम महाराष्ट्र की सबसे बड़ी दूध संस्था गोकुल दूध संघ यानी कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के विधान परिषद में गुटनेता सतेज (बंटी) पाटिल ने इस मुद्दे पर आज मुंबई में महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। अध्यक्ष पद के चुनाव की पृष्ठभूमि में होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोकुल की राजनीति और चुनावी समीकरणों को लेकर पाटिल की भूमिका अहम मानी जा रही है।

ताजा घटनाक्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल ने बड़े सहकारी संस्थानों में सरकार की ओर से निदेशकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद गोकुल दूध संघ के सत्ता समीकरण को लेकर विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस ने इसे निर्वाचित बोर्ड के बहुमत को प्रभावित करने की कोशिश बताया है, जबकि सत्तारूढ़ महायुति की ओर से इस कदम का बचाव किया जा रहा है। कांग्रेस नेता सतेज (बंटी) पाटिल के नेतृत्व वाले पैनल की जीत के बावजूद अध्यक्ष पद का चुनाव विवादों में फंस गया है। राज्य सरकार के नए फैसले ने इस सियासी लड़ाई को और तेज कर दिया है।

13-12 के बहुमत से शुरू हुआ विवाद

19 अक्टूबर को गोकुल दूध संघ के संचालक मंडल के चुनाव में सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। 29 अक्टूबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन महायुति समर्थित 12 संचालक बैठक में शामिल नहीं हुए। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 संचालकों की उपस्थिति जरूरी होने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई।

इसके बाद सतेज पाटिल समर्थक 13 संचालकों ने शशिकांत पाटिल चुएकर को अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया। हालांकि, इस चुनाव को प्रशासनिक मान्यता नहीं मिली और मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया। सतेज पाटिल समर्थक संचालकों ने अध्यक्ष चुनाव की बैठक स्थगित किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने 10 नवंबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नई बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।

महाराष्ट्र सरकार ने नए प्रस्ताव को दी मंजूरी

4 नवंबर को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले सहकारी संस्थानों में पांच सरकारी नामित निदेशकों की नियुक्ति की अनुमति देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी। इनमें चार निदेशकों को मतदान का अधिकार देने का प्रावधान है, जबकि पांचवां अधिकारी मतदान नहीं कर सकेगा।

गोकुल दूध संघ का वार्षिक कारोबार करीब 4,000 करोड़ रुपये होने के कारण यह फैसला उसके संचालक मंडल के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव में बहुमत हासिल करने के बाद भी उसके पैनल को सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। वहीं, महायुति का कहना है कि सहकारी संस्थाओं में नियमों के अनुसार ही निर्णय लिए जाने चाहिए।

कांग्रेस और महायुति के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई

गोकुल दूध संघ केवल एक दुग्ध सहकारी संस्था नहीं, बल्कि पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। कोल्हापुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों दूध उत्पादकों और हजारों प्राथमिक दुग्ध संस्थाओं से इसका जुड़ाव है। गोकुल पर नियंत्रण का मतलब ग्रामीण अर्थव्यवस्था, दूध उत्पादकों और सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव बनाए रखना भी है। यही वजह है कि अध्यक्ष पद का चुनाव कांग्रेस और महायुति के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।

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