दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को करेगा मामले की सुनवाई, पुलिस ने हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में दर्ज कीं 5 FIR; 250 से ज्यादा वीडियो फुटेज की हो रही जांच
Knews Desk- दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों वाली जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के तहत होगी और इसे बुधवार को सुना जाएगा।
इस मामले को एक वकील ने चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखा था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को हुए CJP के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुचित और अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले को उसी दिन अर्जेंट लिस्ट में शामिल करने से मना कर दिया। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “कोर्ट को इस सब में मत घसीटो।”
बुधवार को होगी सुनवाई
याचिकाकर्ता ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। हाई कोर्ट अब 22 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगा। इस दौरान अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, पुलिस की कार्रवाई और मांगी गई राहतों पर विस्तार से विचार करेगी।
हिंसा मामले में 5 FIR दर्ज, 250 वीडियो की जांच
वहीं, दिल्ली पुलिस ने CJP के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के मामले में अब तक 5 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक, कनॉट प्लेस, पार्लियामेंट स्ट्रीट समेत कई थानों में केस दर्ज किए गए हैं।
जांच एजेंसियां अब घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों और अन्य वीडियो फुटेज की मदद से उपद्रवियों की पहचान कर रही हैं। पुलिस करीब 250 से ज्यादा वीडियो क्लिप खंगाल रही है, ताकि हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। साथ ही आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प
CJP की ओर से सोमवार को निकाले गए संसद मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जमकर टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, पुलिस और सुरक्षाबलों के कुछ जवानों को भी चोटें आने की बात सामने आई है।
अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की बुधवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पुलिस कार्रवाई और याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत अपना रुख स्पष्ट करेगी।