भोपाल के नारियल खेड़ा में बुलडोजर कार्रवाई, 50 मकान-दुकान हटाने पहुंची प्रशासन की टीम

Knews Desk- भोपाल के नारियल खेड़ा इलाके में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। वार्ड नंबर 12 में निजी जमीन पर बने करीब 50 मकानों और दुकानों को हटाने के लिए नगर निगम और प्रशासन की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए प्रशासन और नगर निगम की टीम सुबह से ही इलाके में मौजूद रही। अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर से मकानों और अन्य निर्माणों को हटाने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालते नजर आए।

इलाके में तनाव की स्थिति न बने, इसके लिए पुलिस बल को तैनात किया गया था। पुलिसकर्मी पूरे क्षेत्र में निगरानी करते रहे।

स्थानीय लोगों ने उठाए नोटिस और समय को लेकर सवाल

कार्रवाई का सामना कर रहे लोगों का कहना है कि उनके परिवार कई दशकों से यहां रह रहे हैं। कुछ रहवासियों ने दावा किया कि वे करीब 40 वर्षों से नारियल खेड़ा में रह रहे हैं। स्थानीय निवासी फरहा के मुताबिक, उन्हें मकान हटाए जाने की जानकारी पहले से नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि कार्रवाई से लगभग चार घंटे पहले अनाउंसमेंट के जरिए मकान खाली करने की सूचना मिली।

रहवासियों ने कहा कि यदि प्रशासन को निर्माण हटाने थे तो उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था, ताकि वे वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कर सकें।

रजिस्ट्री और सरकारी दस्तावेज होने का दावा

स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि उनके पास मकानों की रजिस्ट्री, बिजली-पानी के कनेक्शन और संपत्ति कर जमा करने से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। शकुंतला अहिरवार समेत कई रहवासियों ने मांग की कि कार्रवाई से पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जाए।

लोगों का कहना है कि वर्षों से रहने और सरकारी शुल्क जमा करने के बावजूद अचानक मकान हटाए जाने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कुछ लोगों ने मुआवजे या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए जाने की मांग भी की है।

बारिश के बीच बेघर होने का डर

भोपाल में बारिश के बीच चल रही इस कार्रवाई ने प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि मकान टूटने के बाद उनके पास तुरंत रहने के लिए दूसरी जगह नहीं है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ बारिश के मौसम में खुले में रहने की स्थिति गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है।

रहवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि उन्हें कुछ समय की मोहलत दी जाए, जिससे वे दूसरी जगह रहने की व्यवस्था कर सकें।

SDM ने हाई कोर्ट के आदेश का दिया हवाला

कार्रवाई को लेकर SDM रविश कुमार श्रीवास्तव से जानकारी लेने की कोशिश की गई। उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार करते हुए इतना कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के पालन में की जा रही है।

प्रशासन और नगर निगम की टीम पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक अभियान आगे भी जारी रह सकता है और इसे करीब तीन दिनों तक चलाए जाने की बात सामने आई है। इस दौरान निजी जमीन पर बने अन्य निर्माणों को भी हटाया जा सकता है। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन की कार्रवाई जारी है।

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