मालेगांव केस में बड़ा फैसला, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 4 आरोपियों को दी राहत, सबूतों के अभाव में आरोप रद्द

डिजिटल डेस्क- 2006 के चर्चित मालेगांव बम विस्फोट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को राहत दे दी है। अदालत ने उनके खिलाफ दोषारोपण तय करने के आदेश को रद्द कर दिया, जिसके साथ ही इन आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावी रूप से समाप्त हो गई है। अदालत ने यह निर्णय इस आधार पर लिया कि आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए सबूत तकनीकी रूप से पर्याप्त नहीं थे और आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसी के साथ अदालत ने उनके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र को भी निरस्त कर दिया।

कौन हैं राहत पाने वाले आरोपी?

इस फैसले से जिन चार आरोपियों को राहत मिली है, उनमें लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवारिया शामिल हैं। इससे पहले इसी मामले में 11 अन्य आरोपियों को भी अदालत बरी कर चुकी है। अब इस फैसले के बाद इस केस में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगभग खत्म होती नजर आ रही है। 8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव में शब-ए-बारात के दिन एक मस्जिद के पास सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस हमले में 37 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी और जांच एजेंसियों ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में मालेगांव से 9 लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भी जांच को सही ठहराया था। आगे चलकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी इस मामले में आरोपियों के खिलाफ अदालत में केस पेश किया था।

NIA के सामने अब क्या विकल्प?

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या NIA इस मामले में आगे कोई कानूनी कदम उठाएगी। क्या एजेंसी फिर से नए सिरे से सबूत जुटाकर अदालत का रुख करेगी या यह मामला यहीं समाप्त हो जाएगा—इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है। इस बीच, मामले के एक अन्य आरोपी रहे नूरुल हुदा ने भी सवाल उठाया है कि क्या जांच एजेंसी अब दोबारा इस केस को अदालत में ले जाएगी। हालांकि, NIA की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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