डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा की प्रचंड बढ़त और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की संभावित हार ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी तनाव पैदा कर दिया है। सोमवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी आवास के बाहर उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ लोगों ने वहां पहुंचकर “जय श्री राम” के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस घटना के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री आवास और राज्य सचिवालय की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
कालीघाट और नबन्ना बने अभेद्य किले
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद राज्य प्रशासन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त कर दिया है। केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के चारों ओर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रुझानों के बाद संभावित विरोध प्रदर्शनों या किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
नारेबाजी के बाद एक्शन में चुनाव आयोग
कालीघाट जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में, जहाँ मुख्यमंत्री का निवास है, वहां नारेबाजी की घटना को सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। जैसे ही चुनाव आयोग को जानकारी मिली कि कुछ प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के घर के करीब पहुंचकर नारेबाजी कर रहे हैं, तुरंत भारी पुलिस तैनाती के आदेश जारी किए गए। इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई है और संदिग्ध आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
रुझानों में भाजपा की ‘प्रचंड सुनामी’
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर शाम चार बजे तक के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं हैं। रुझानों के अनुसार, 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी 198 सीटों पर बढ़त बनाकर पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े को काफी पीछे छोड़ चुकी है। इसके विपरीत, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी का ग्राफ तेजी से गिरा है और पार्टी महज 89 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। इन आंकड़ों ने राज्य में सत्ता परिवर्तन के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि बंगाल में एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा ममता बनर्जी का शासन अब समाप्ति की कगार पर है और भाजपा एक ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है।